डाक्टर ने उच्चाधिकारियों को दी रिपोर्ट, कोई सुनवाई नहीं
स्थानीय पशु चिकित्सालय पर विभाग का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। गांव के कुछ लोग अपनी दबंगई के चलते एक कक्ष को छोड़ सभी कक्षों में भूसा भर चुके हैं। मात्र डाक्टर का कक्ष ही बचा है। यहीं नहीं परिसर को घूरास्थल बना दिया है। गोबर डाला जा रहा है। विभाग की लापरवाही है कि परिसर की जमीन भी आसपास के खेत स्वामियों ने अपने खेतों में जोत ली है।
पिछले कई वर्षों से दबंगई के चलते पशु चिकित्सालय संपत्ति पर विभाग का नियंत्रण नहीं है। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरके गंगवार का कहना है कि गांव में किससे बुराई ली जाए। उन्होंने संबंधित लोगों से बात की, लेकिन उनके हठीले रवैये के कारण उन्होंने कुछ कहना भी बंद कर दिया है। विभाग के उच्चाधिकारियों को इस संबंध में सूचना दी है, लेकिन ऊपर से भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। दबंगई इस हद तक बढ़ गई है कि परिसर की भूमि को भी आसपास के खेत स्वामी अपने खेतों में मिला चुके हैं। लगातार परिसर छोटा होता जा रहा है। उनके बैठने के अलावा पशु चिकित्सालय में कोई कक्ष नहीं बचा है। जिसमें ग्रामीणों का भूसा न भरा हो। एक कक्ष की किवाड़ टूटी हुई थी। उसमें भी भूसा भर दिया गया। टूटी किवाड़ की जगह टटिया भी गांव वालों ने बांध दी है। पशु चिकित्सालय की हालत यह है कि घनी घास के कारण पशु चिकित्सालय के कुछ हिस्सा तो दिखाई ही नहीं देता है। ग्रामीणों की इस करतूत से पशु चिकित्सक भी इसमें साफ-सफाई नहीं करा रहे हैं।