दंगल की शुरूआत पूर्व जिला केसरी सर्वेश सिंह पहलवान ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। सबसे बड़ी कुश्ती गुलड़िया दंगल की शील्ड के लिए हुई। परंतु कुश्ती बराबर पर छूट जाने के कारण किसी को शील्ड नहीं हाथ लगी। पिछले चार वर्षों से पहलवान यहां की शील्ड हासिल नहीं कर सके हैं। पूर्व राज्य मंत्री भूपेंद्र सिंह दद्दा ने ढाई हजार की धनराशि को दोनों पहलवानों को आधी-आधी करके बांट दी। 1100 रुपये इनाम की कुश्ती नीतेश कुमार के सौजन्य से हुई। इसमें चंदौसी के आजाद और हाथरस अजीत सिंह के बीच हुई। यह कुश्ती भी बराबर पर छूटी। दंगल संयोजक चंद्रशेखर सिंह ने इनाम की राशि दोनों पहलवानों में आधी-आधी कर दी। 1000 रुपये की इनामी कुश्ती महावीर सिंह के सौजन्य से हुई। इसमें चंदौसी के यामीन और मेरठ के सत्यभान के बीच हुई। मेरठ के सत्यभान ने यह कुश्ती जीत कर दर्शकों में वाहवाही लूटी और पुरस्कार के अलावा दर्शकों से हजारों रुपये का इनाम भी बटोरा।
सिताब नगर के परमानंद, शेर सिंह पाली, गुलड़िया के मास्टर राम सिंह, प्रताप सिंह बाबू जी, श्रीपाल सिंह, मास्टर सुरेश चंद्र, राधेश सिंह, भेष कुमार, सौरभ कुमार ने 500 रुपये वाली कुश्तियां कराई। बाकी बचे पहलवानों को पूर्व राज्य मंत्री दद्दा ने अपनी ओर से हजारों के पुरस्कार बांट दिए।
दंगल की अध्यक्षता मानवेंद्र सिंह ने की। रेफरी वजीरगंज के पहलवान बिट्टन रहे। संचालन संतोष सिंह ने किया। शांति व्यवस्था के लिए पूर्व राज्य मंत्री दद्दा ने मूसाझाग के एसआई जसपाल सिंह को ट्राफी भेंट की।