उझानी/कछला (बदायूं)। सावन में निरंतर रफ्तार पकड़ रही कांवड़ यात्रा के बीच कांवड़िये भगवान भोलेनाथ की भक्ति में इस कदर लीन नजर आ रहे हैं कि जलाभिषेक से पहले कोई कमीं नहीं रहने देना चाहते। गंगाघाट पर पूजन के बाद कांवड़ लेकर शिवालय तक पहुंचने से पहले रास्ते में थके तो विश्राम स्थलों या फिर सड़क किनारे पेड़ों की छांव में आराम जरूर किया लेकिन अगर कांवड़ जमीन पर रखनी पड़ी तो उसे उठाने से पहले भोले की स्तुति करते हुए कान पकड़कर क्षमा मांगी। ऐसे कई नजारे रास्ते में देखने को मिल रहे हैं।
कांवड़ यात्रा के दौरान बरेली-मथुरा हाईवे पर शनिवार पूर्वाह्न पीलीभीत जिले के बरखेड़ा के कांवड़ियों की टोली में शामिल कांवड़ियों ने सड़क किनारे एक पेड़ की छांव में विश्राम करने के बाद यात्रा शुरू की तो सभी पहले कांवड़ के पास इकट्ठा हुए, फिर कान पकड़कर उठक-बैठक लगाने लगे और क्षमा मांगी। उन्होंने भगवान भोलनाथ और इष्टदेव का मनन भी किया।
टोली के साथ मौजूद पुरोहित विश्वप्रकाश ने ऐसा करने के पीछे तर्क दिया कि कांवड़ जमीन पर रखकर आराम करते समय कांवड़ियों का ध्यान का भटकना लाजिमी है। अनजाने में कोई चूक भी हो सकती है। इसीलिए कांवड़ उठाने से पहले कांवड़िये गलती के लिए माफी मांगते हैं।
कछला गंगाघाट पर जगत ब्लॉक क्षेत्र के गांव सलेमपुर निवासी कांवड़ियों की टोली के मुखिया अवनेश पाल ने बताया कि जल भरने से पहले कांवड़ यात्रा शुरू करने के अपने नियम हैं। कांवड़िये सभी नियमों का पालन भले ही नहीं कर पाएं लेकिन यात्रा शुरू करने से पहले पूजन फिर आरती की जाती है। आरती के बाद टोली में शामिल सभी कांवड़िये माथे पर भगवान भोलेनाथ का भस्म का टीका लगाते हैं। बरेली में बहगुलपुर के शिवभक्तों की टोली ने गंगाघाट पर धार्मिक रीत-रिवाज से पूजन किया।
टोली में शामिल भारत सिंह और प्रदीप कुमार के मुताबिक- उनकी टोली शाहजहांपुर जिले में पटना देवकली के शिव मंदिर में जलाभिषेक करेगी। ऐसी ही कई और टोलियों के कांवड़ियों ने कांवड़ यात्रा के कायदे के अनुरूप धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया।
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डाक कांवड़ के बड़े कठिन हैं नियम, नहीं रख सकते जमीन पर
कांवड़ यात्रा में अमूमन पैदल चलने वाले कांवड़ियों की संख्या सर्वाधिक नजर आ रही है लेकिन इसके विपरीत डाक कांवड़ को शिवालय तक पहुंचाने के लिए कांवड़ियों को बड़े कठोर नियमों से होकर गुजरना पड़ता है। शुक्रवार दोपहर पीलीभीत जिले के बीसलपुर के रहने वाले शिवभक्तों की टोली डाक कांवड़ लेकर गंगाघाट से निकली तो 11 कांवड़ उठाकर चलने के लिए 25 से अधिक कांवड़िये टोली में शामिल थे। कांवड़ियों में सौरभ ने बताया कि डाक कांवड़ का मतलब ही उसे जमीन पर रखे बिना शिवालय तक लेकर पहुंचना होता है। कांवड़ यात्रा के दौरान अगर किसी को लघुशंका या फिर भोजन करना हो तो बाकी के 11 सदस्यों के कदम रुकते नहीं। लघुशंका करने के बाद वह कांवड़ को तभी हाथ लगाते हैं जब स्नान के बाद भोले का ध्यान कर लिया जाए। आचार्य प्रवीण शर्मा कहते हैं कि कांवड़ उठाने से लेकर जलाभिषेक करने तक भगवान भोलेनाथ का मनन करते रहना चाहिए।
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फोटो- 30 बीडीएनयूजेएचपीएच-04
... जब कांवड़ियों के बीच सड़क पर थिरकने लगा कलाकार
कांवड़ यात्रा के दौरान हाईवे पर गांव फूलपुर के पास बरेली और पीलीभीत के कांवड़ियों की टोलियां धमाल मचाते हुए बराबर आ गईं। दोनों की ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर डीजे और उनके ऊपर बने स्टेज पर कलाकार नृत्य कर रहे थे। दोनों टोलियों के कांवड़ियों में देखादेखी जोश बढ़ा तो वे सड़क पर थिरकने लगे। उसी दौरान शंकर बना एक कलाकार स्टेज से कूदा और सड़क पर ही थिरकने लग गया। कांवड़ियों ने उसका हौसला बढ़ाया। करीब आधा घंटे तक वह सड़क पर ही थिरकता रहा। इस दौरान कांवड़ियों के वाहनों की लंबी कतार लग गई। पुलिस कर्मियों को हस्तक्षेप करके उनकी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां आगे बढ़ानी पड़ीं। इससे पहले इसी कलाकार ने आग के गोले में नृत्य किया।
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कांवड़ लेने इटौआ से हरिद्वार रवाना हुए शिवभक्त
बगरैन। शिव भक्तों का जत्था कांवड़ लेने शुक्रवार को इटौआ से रवाना हुआ। गत पांच वर्ष से गांव से बड़ी संख्या में शिव भक्त महादेव का जलाभिषेक करने के लिए हरिद्वार से गंगाजल लेने जाते हैं। हरिद्वार रवाना होने से पहले शिवभक्तों ने शिव मंदिर, शनि मंदिर, गांव देवता मंदिर में माथा टेका। जत्थे में शामिल शिव भक्त देवपाल सिंह, सत्यपाल सिंह, जुगेंद्र सिंह, चेतेंद्र सिंह, अनेकपाल सिंह, जुगेंद्र चौहान, कुशलपाल सिंह आदि आठ अगस्त को लौटने के बाद शिवालयों में महादेव का जलाभिषेक करेंगे। संवाद
अमरनाथ यात्रा से लौटे शिव भक्तों ने भंडारा कराया
बिसौली। श्री अमरनाथ सेवा समिति के तत्वावधान में अमरनाथ यात्रा से लौटे शिव भक्तों ने भंडारे का आयोजन किया। इससे पहले यहां अखंड रामायण के पाठ का समापन हुआ।
श्री अमरनाथ सेवा समिति के बैनर तले डेढ़ दशक से शिव भक्त अमरनाथ दर्शन को जाते हैं। वहां से वापस आने के बाद अखंड रामायण पाठ और भंडारे का आयोजन करते हैं। रामायण का अखंड पाठ बृहस्पतिवार को प्रारंभ हुआ था। इसके बाद भंडारे का आयोजन किया गया। इस मौके पर डॉ. ब्रजेश यादव, अशोक शर्मा, रोहित, डॉ. मनोज माहेश्वरी, मोनू महाजन, दुर्गेश वार्ष्णेय, पवन, गणेश वार्ष्णेय आदि का सहयोग रहा। संवाद