बदायूं। दातागंज मार्ग स्थित श्रीमद्ब्रह्मदत्त गोशाला प्रांगण में षष्ठ गोमहोत्सव एवं गोपूजन कार्यक्रम भव्यता के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ गोरक्षार्थ 24 कुंडीय यज्ञ के साथ किया गया। महोत्सव में बच्चों ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये। गोप्रेमियों ने गायों को हरा चारा और अन्न गुड़ खिलाकर विधिविधान से उनका पूजन किया। समापन पर विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया।
सोमवार को आचार्य चन्द्रदत्त एवं हरिद्वार से आये स्वामी यज्ञदेव ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन कराया। हवन में अनेक दंपती ने यज्ञकुंड में अपनी आहुति डाली। इस अवसर पर राज्यमंत्री महेश चंद्र गुप्ता ने कहा कि गाय ही एक ऐसी प्राणी है जिसमें 33 कोटि देवी देवताओं का वास होता है। यह मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक साथ निभाती है। इसलिए हम सबको मिलकर सामर्थ्यानुसार गायों को गोद लेकर गोसेवा के भागीदारी बनना चाहिए।
दर्जाप्राप्त राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने कहा कि गोशाला में सैकड़ों बेसहारा गोवंशों को पालना बहुत कठिन, लेकिन पुण्य का कार्य है, जिसे गोशाला निर्बाध रूप से कर रही है। हरिद्वार से आये स्वामी यज्ञदेव महाराज ने गायों की महत्ता पर प्रकाश डाला। गोशाला के आजीवन सदस्य अशोक खुराना, एस के मल्होत्रा आदि ने भी विचार रखे। ब्रह्नदत्त गोशाला की ओर से घर-घर गाय पाल रहे गोपालकों को गोपालक सम्मान से सम्मानित किया गया। अंत में कार्यक्रम संयोजक गौशाला के सचिव सचिन भारद्वाज ने सभी आगन्तुकों का आभार जताया। मंचीय कार्यक्रम की सारी तैयारियां युवा मंच के संस्थापक ध्रुव देव गुप्ता की टीम द्वारा की गईं। कार्यक्रम में दीपक रस्तोगी, दीपक गुप्ता, कृष्ण गौरव, संजीव वैश्य, सौरभ शंखधार, संजय सिंह गौर, सुनील गुप्ता, मनोज कुमार, प्रेमप्रकाश अग्रवाल, उत्कर्ष आदि का विशेष सहयोग रहा। संचालन रविंद्रमोहन सक्सेना ने किया।
बांस बरौलिया वृद्धाश्रम में मनाई गई गोपाष्टमी
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव बांस बरौलिया स्थित वृद्धाश्रम पर सोमवार को गोपाष्टमी धूमधाम से मनाई गई। यहां संस्था के अध्यक्ष वेदव्यास शर्मा ने गायों का तिलक कर पूजा-अर्चना की। उन्होंने कहा कि आज के पावन दिन पर मैया यशोदा ने भगवान श्रीकृष्ण का शृंगार करके उन्हें गोचरण के लिए प्रथम बार भेजा था। जिस ब्रह्म की चरणरज के लिए ब्रह्मा शंकर तरसते हैं, वह चरण गो माता की सेवा के लिए कंकर, पत्थर कुंज निकुंजों में विचरण करते हैं। गाय भगवान श्रीकृष्ण के लिए सबसे ज्यादा प्रिय है। जिसकी सेवा भगवान श्रीकृष्ण तक पहुंचती है। उन्होंने कहा कि गोमाता की सेवा के कारण ही प्रभु का नाम गोपाल पड़ा। इस मौके पर शिव गौड़, विशाल माहेश्वरी, रामप्रकाश शर्मा, गोविंद शर्मा, रामकिशोर शर्मा, पन्नालाल आदि मौजूद रहे। संवाद