उझानी (बदायूं)। अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में चल रहे 108 कुंडीय महायज्ञ का बुधवार को पूर्णाहुति के साथ समापन हो गया। गाय, गंगा और गायत्री के जयकारे लगाते हुए जुटे अनुयायी अंतिम दिन कई संस्कारों के सहभागी बने। उन्होंने बुराई त्यागने और समाज को संस्कारवान बनाने की दीक्षा भी ली। टोली नायक समेत गायत्री परिवार के पदाधिकारियों को आयोजक मंडल ने धार्मिक रीति रिवाज से सम्मानित किया।
अंतिम दिन 108 कुंडीय महायज्ञ में पूर्णाहुति से पहले गायत्री परिवार के टोली नायक शशिकांत सिंह ने अनुयाइयों को जीवन में गुरु के महत्व की जानकारी दी। कहा कि गुरु के जरिये ही ज्ञान अर्जित होता है। शिष्य को भी ऐसा आचरण करना चाहिए जो गुरु के मान को बढ़ाए। मनुष्य को अपना जीवन बहुमूल्य बनाने के लिए तप करना चाहिए। इसके बाद ही शक्ति मिलती है। सहायक टोली नायक बसंतीलाल ने कहा कि गृहस्थ जीवन भी तपोवन है। गृहस्थ आश्रम में विवाह बंधन सर्वोत्तम बंधन है। उन्होंने अनुयाइयों को कन्या भ्रूण हत्या नहीं करने, दहेज से दूर रहने, नशामुक्त समाज की स्थापना करने और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने का संकल्प दिलाया। दीक्षा लेने के साथ ही अनुयाइयों ने दक्षिणा में अपने अंदर की बुराइयों को भेंट कर दिया।
कार्यक्रम स्थल पर ही पुंसवन, विद्यारंभ और यज्ञोपवीत समेत कई तरह के संस्कार भी कराए गए। बच्चों के मुंडन संस्कार भी हुए। बालिकाओं ने दीपयज्ञ कराया। गाय, गंगा और गायत्री के जयकारों के बीच अनुयाइयों ने धर्म की रक्षा का संकल्प ग्रहण किया। आयोजक मंडल के सदस्यों में आर्येंद्र यादव, संजीव कुमार शर्मा, डॉ. वीरेंद्र पाल शर्मा, ममता शर्मा आदि ने टोली नायक समेत गायत्री परिवार के पदाधिकारियों को विशेष सहयोग के लिए सम्मानित किया। उन्हें अंगवस्त्र भेंट किए गए। प्रदीप गोयल, धीरेंद्र सोलंकी, ध्रुव यादव और प्रदीप गुप्ता आदि ने गायत्री आरती की। इस मौके पर दीपमाला गोयल, सुखपाल शर्मा, रामभरोसे लाल माहेश्वरी, अमर सिंह, बॉबी आदि मौजूद रहे।