बदायूं। कहते हैं कि यदि कुछ करने का जज्बा है तो सफलता कदम चूमती है। प्रख्यात कवि स्वर्गीय डॉ. उर्मिलेश शंखधार की बेटी कवयित्री सोनरूपा विशाल भी जिले का नाम रोशन कर चुकी हैं। सात समंदर पार अमेरिका के शहरों में अपनी रचनाओं के जरिए बदायूं का नाम दुनिया में पहुंचाने वाली सोनरूपा विशाल के यात्रा वृतांत ‘अमेरिका और 45 दिन’ को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने जगदीश गुप्त पुरस्कार की घोषणा की है।
शहर की प्रोफेसर कॉलोनी में रह रहीं कवियित्री सोनरूपा विशाल को उनकी रचनाओं के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अब तक कई सम्मान मिल चुके हैं। 2018 में वह अमेरिका गईं। जहां पर अंतरराष्ट्रीय हिंदी समिति की ओर से 25 शहरों में कवि सम्मेलनों का आयोजन किया गया था। उन कवि सम्मेलनों में सोनरूपा ने अपनी रचनाओं के माध्यम से खूब वाहवाही लूटी। अमेरिका में उन्होंने जो कुछ देखा उसी पर उन्होंने ‘अमेरिका और 45 दिन’ शीर्षक से पुस्तक लिखी। सोनरूपा ने बताया कि उन्होंने यह पुस्तक अमेरिका से लौटने के बाद ही लिखी थी। उन्होंने इस पुस्तक में अमेरिका में भारतीय संस्कृति को विभिन्न दृष्टिकोण से देखा और लिखा है। इससे पूर्व सोनरूपा को उनकी पहले गजल संग्रह ‘लिखना जरूरी है’ के लिए भी हिन्दी संस्थान उत्तर प्रदेश द्वारा हरिवंशराय बच्चन पुरस्कार मिल चुका है। सोनरूपा की इस पुस्तक के पुरस्कार के लिए चयनित होने पर साहित्य जगत से जुड़े लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं हैं।