किसान टकटकी लगाए आसमान की ओर निहारते रहते हैं न वर्षा ही हो रही और न ही पर्याप्त बिजली मिल रही। तीसरे दिन बिजली आती भी है, तो खेत में पानी पहुंचते ही चली भी जाती है। बिजलीघर पर लोड के कारण अलग-अलग फीडर को टू फेस करके चलाया जाता है, जिससे तीसरे दिन पावर सप्लाई मिल पाती है। वैसे शेड्यूल दिन में 11 से 4 और रात में 11 से 4 का है, लेकिन ये दिखावा ही है। रोस्टिंग के कारण भारी कटौती हो रही है। बिजली की कमी के कारण मुख्यमंत्री की फ्री सिंचाई योजना भी कारगर साबित नहीं हो रही। किसानों का कहना है कि अगर यह फसल भी वर्षा हुई तो वह भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे। वर्षा न होने के साथ ही कुछ दिनों से लगातार चल रही तेज पछुआ हवाएं और धूप भी फसलों को नुकसान पहुंचा रही है। ----
भूड के क्षेत्र की सारी फसल सूखने लगी हैं, बिजली न आने से किसानों को और परेशानी हो रही है।
सत्येंद्र यादव।
वर्षा न होना और बिजली न मिलने से फसल ही बर्बाद हो जाएगी, तो फिर मुआवजा किस काम का।
सोनपाल मिश्रा ।
उद्योग-धंधे ठप पड़े हैं, किसान बेहाल है। इंवर्टर भी चार्ज करने भर को बिजली नहीं मिल पा रही।
कल्लू ।
का वर्षा जब कृषि सुखानी, बादल आते हैं, लेकिन बगैर बरसे गुजर जाते हैं। साथ ही बिजली भी धोखा दे रही है। मुफ्त सिंचाई योजना बिन बिजली फेल हो रही है।
कृपाल सिंह यादव