सबूत जुटाने में हमेशा ही अहम रोल निभाता है फोन
कहीं भारी न पड़ जाए सबूत जुटाने में पुलिस की चूक
सेलफोन एक ऐसी चीज है, जो अपराधियों लिए कभी मुफीद तो अक्सर असलियत उजागर करने में मददगार साबित हो जाती है। खासकर पुलिस तो सबसे पहले कोई भी मामला संदिग्ध नजर आने पर सबसे पहले सेलफोन को कब्जे में लेती है, लेकिन प्रभारी डीजीसी (क्रिमिनल) साधना शर्मा के मामले में पुलिस ने ऐसा नहीं किया। उनके सेलफोन में भी कई राज छिपे हो सकते हैं? पर न जाने क्यों पुलिस ने घटना वाले दिन से अब तक सेलफोन को कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच को भेजना उचित नहीं समझा।
प्रभारी डीजीसी साधना शर्मा के सेलफोन के बारे में सूत्रों की मानें तो उसमें बहुत कुछ रिकार्ड है। घटना से पहले उनकी कब किससे बात हुई और किसने उन्हें धमकाया, यह भी रिकार्ड रहा होगा। हत्या के खुलासे के दौरान भी यह बात चली कि रुपयों के लेनदेन और प्लॉटों के मामले में उनके और भाजपा नेता पीसी शर्मा के बीच क्या पक रहा था? सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था, तो फिर साजिश से लेकर हत्या में शामिल किसी भी शख्स ने उनकी बदायूं से घर आने-जाने के बारे में लोकेशन पता लगाने के लिए सेलफोन पर ही संपर्क किया होगा। काफी हद तक यह भी संभव है कि साधना ने अपने किसी करीबी को अनहोनी की आशंका या फिर आपसी मनमुटाव को लेकर चर्चा की हो।
सूत्र बताते हैं कि घटना वाले दिन से तीन दिन बाद तक साधना का सेलफोन किसी गैर के हाथों में रहा था। ऐसे की कई और सवालों का उत्तर हासिल करने के लिए पुलिस को भी चाहिए था कि वह घटना वाले दिन साधना शर्मा के सेलफोन को कब्जे में लेकर तथ्य जुटाती तो हो सकता था कि केस की असलियत बहुत पहले ही सामने आ जाती। जानकारों की मानें तो ऐसा अभी भी किया जा सकता है। सेलफोन से भले ही छेड़छाड़ कर रिकार्ड कॉल्स डिलीट कर दी जाएं, लेकिन प्रयोगाशाला में डाटा रिकवर होने में देर नहीं लगेगी। शंका और आशंकाएं सही साबित हुईं, तो पुलिस को घटना से जुड़े पुख्ता सबूत जुटाने में भी दिक्कत नहीं होगी।
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पुलिस की हर संभव मदद की जाएगी
उझानी। साधना शर्मा की हत्या का खुलासा हो जाने के बाद इस केस की वादी उनकी छोटी बहन विपर्णा गौड ने बताया कि उन्होंने पूरी जानकारी कर ली है। पुलिस ने सही तथ्यों के आधार पर वर्कआउट किया है। पुलिस को केस मजबूत करने में जिन सबूतों की जरुरत पड़ेगी, कोशिश करके उन्हें भी मुहैया कराया जाएगा। विपर्णा पे इस घटना में पीसी शर्मा के साथ उनकी पत्नी के भी शामिल होने की बात कही।
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मस्ताना को पकड़ने को करनी पड़ेगी मशक्कत
उझानी। प्रभारी डीजीसी साधना शर्मा की हत्या को सुपारी लेने वाला मुजरिया थाना क्षेत्र का हार्ड क्रिमनल अब्दुल नवी उर्फ मस्ताना की लोकेशन अभी ट्रेस नहीं हो पा रही है। मस्ताना के किसी दूसर प्रदेश में छिपे होने की आशंका बनी हुई है। पुलिस ने हालांकि उसके एक ठिकाने पर दबिश भी दी लेकिन सफलता नहीं मिली। मस्ताना के बारे में एक चर्चा तो आम है कि वह घटना करने के बाद इलाके से गुम हो जाता है।
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साधना शर्मा के सेलफोन को कब्जे में नहीं लिया गया है। उसकी कोई खास जरूरत भी नहीं थी। पुलिस के पास आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। सबूतों के आधार पर ही आरोपियों को कठोर सजा दिलाने की कोशिश की जाएगी।
- गोपीचंद्र यादव, कोतवाल।