कस्बे के वार्ड नंबर 11 में आतिशबाजी बनाते समय विस्फोट होने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। मोहल्ले में एक के बाद एक तीन धमाके होने से लोग भी दहशत में आ गए। धमाकों से आतिशबाज के घर की छत और दीवारों में दरारें पड़ गईं।
वार्ड नंबर 11 निवासी बबलू (22) पुत्र अच्छन आतिशबाज है। बबलू रविवार सुबह घर में आतिशबाजी बना रहा था। इसी दौरान किसी तरह से विस्फोट हो गया। एक के बाद एक तीन तेज धमाके हुए। गनीमत रही कि उस समय घर में कोई और नहीं था। धमाका होने से बबलू गंभीर झुलस गया। उसे जिला अस्पताल लाया गया। यहां से बरेली रेफर कर दिया गया। बरेली में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। धमाकों की खबर मिलने पर पुलिस ने मौका मुआयना किया। मौके से कुछ सैंपल भी लिए गए हैं। अब तक रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कोई तहरीर नहीं दी गई है। धमाकों से मोहल्ले के लोग दहशत में हैं। एसओ उसहैत कमलेश सिंह ने बताया कि जांच की जा रही है। जांच के बाद ही इस बारे में कुछ कहा जा सकता है।
घनी आबादी में था कारखाना
क्षमता से ज्यादा की आतिशबाजी बनाने की आशंका
उसहैत। आतिशबाजी के जिस कारखाने में धमाके हुए वह घनी आबादी में चल रहा था। हालांकि बबलू के पास आतिशबाजी बनाने और बेचने का लाइसेंस है, लेकिन यह लाइसेंस बस्ती से बाहर म्याऊं रोड के पते पर जारी हुआ है। नियमों को दरकिनार कर कारखाना आबादी में चल रहा था।
डीएम कार्यालय से आतिशबाजी बनाने और बेचने के लाइसेंस जारी होते हैं। लाइसेंस धारक को आतिशबाजी बनाने और स्टॉक की सीमा निर्धारित होती है। यह भी तय होता है कि वह कितनी क्षमता तक के पटाखे बना सकता है। बबलू लंबे समय से बस्ती में कारखाना चला रहा था। पुलिस ने कभी गौर नहीं किया। उसका स्टॉक और आतिशबाजी में इस्तेमाल हो रही सामग्री की भी लंबे समय से जांच नहीं हुई थी। गनीमत रही कि जिस समय धमाके हुए मकान में आतिशबाजी का ज्यादा स्टॉक नहीं था। अगर ऐसा होता तो आसपास के लोग भी धमाकों की जद में आ सकते थे।
बबलू के घर में खाना बनाते वक्त आग लग गई थी। बबलू आग बुझाने के लिए घर में घुसा। इसी दौरान यहां रखी आतिशबाजी में विस्फोट हुआ। बबलू के पास लाइसेंस है। वह म्याऊं रोड पर आतिशबाजी बनाता है। घनी बस्ती में आतिशबाजी बनाने का काम नहीं होता था। -कमलेश सिंह, एसओ उसहैत
जिले में आतिशबाजी के 17 लाइसेंस
जिले में आतिशबाजी के 17 लाइसेंस हैं। लाइसेंस धारक को 15 किलो कच्ची और 25 किलो बना हुआ माल रखने की सीमा तय होती है। समय-समय पर आतिशबाजी के गोदामों का निरीक्षण का भी प्रावधान है। नियमानुसार आतिशबाजी बनाने का कारखाना बस्ती से बाहर होना चाहिए। हालांकि आतिशबाजी बेचने की दुकान बाजार में हो सकती है, लेकिन यहां आग बुझाने के पर्याप्त प्रबंध होने चाहिए। गौर करने वाली बात यह है कि जिले में ज्यादातर आतिशबाज लाइसेंस की शर्तों का पालन नहीं कर रहे।