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महिला समेत तीन अन्य दोषियों को भी सात-सात साल कैद
तीन दोषियों पर 15-15 और तीन पर पांच-पांच हजार जुर्माना
स्पेशल जज एससी-एसटी एक्ट पंकज कुमार अग्रवाल ने सामूहिक दुष्कर्म में नामजद दो सगे भाइयों समेत तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए 20-20 साल कैद की सजा सुनाई है। इस मामले में सहयोग करने पर एक महिला समेत तीन दोषियों को सात-सात साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने तीन आरोपियों पर 15-15 और तीन पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है।
सामूहिक दुष्कर्म की वारदात दातागंज कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में तीन नवंबर 2011 को हुई थी। एक गांव के रहने वाले व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी पत्नी शौच को गई थी। रास्ते में जगदीश की पत्नी रूपवती उर्फ मुंडी उसे अपने साथ ले गई। काफी तलाश के बाद भी उसकी पत्नी का पता नहीं लगा। वादी ने जगदीश कश्यप, रति कश्यप, रूपवती उर्फ मुंडी, बनवारी पुत्र धनपाल, अमर सिंह पुत्र होरी लाल और हरिद्वारी पुत्र कुंवरसेन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने 10 दिसंबर 2011 को उसकी पत्नी को समरेर के पास से बरामद कर लिया।
न्यायाधीश पंकज कुमार अग्रवाल ने पत्रावली में मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी रईस अहमद और बचाव पक्ष की बहस सुनने के बाद गैंगरेप में नामजद सगे भाई जगदीश, रति कश्यप और बनवारी पुत्र धनपाल को सामूहिक दुष्कर्म का दोषी करार दिया। इन तीनों को 20-20 साल कैद के साथ 15-15 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। वहीं कोर्ट ने रूपवती उर्फ मुंडी, अमर सिंह और हरिद्वारी को वादी की पत्नी को बहला-फुसला कर ले जाने का दोषी करार दिया। इन तीनों को सात-सात साल कैद और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।