पत्नी का शव ठिकाने लगाने के बाद अर्जुन बरेली गया था। उसने जो योजना बनाई वह फुल प्रूफ थी, लेकिन मोबाइल लोकेशन से वह पकड़ लिया गया। 10 दिन तक पुलिस भी अर्जुन के शातिर दिमाग की करामात नहीं समझ सकी। अभी भी यह साफ नहीं है कि उसने अपनी पत्नी की हत्या की या यह खुदकुशी है? भेद खुलने के बाद अर्जुन खुद जो कहानी बता रहा है वह सुनकर पुलिस भी अचरज में हैं।
अर्जुन के मुताबिक वह 18 मई की रात खेत पर गया था। घर आने पर उसका पत्नी से झगड़ा हो गया। 19 मई को सुबह जब वह सोकर उठा तो ऊषा का शव फांसी के फंदे पर लटक रहा था। उसने शव उतार कर चारपाई के नीचे रख दिया। रात में शव बोरे में रखा और बाइक से लेकर उसे अकेले सोत नदी के किनारे पहुंचा। यहां गड्डा खोदकर शव दफन कर दिया। 20 मई को वह घर से चला गया। घटना की पूरी जानकारी उसके पिता सूरजपाल को भी थी। इसी दिन सूरजपाल ने थाने में अर्जुन और उसकी पत्नी ऊषा के गुमशुदा होने की सूचना दी। उसने तहरीर में दोनों के 19 मई को लापता होने की बात कही थी। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन खंगाली की तो पता चला कि अर्जुन 20 और 21 मई को गांव में ही था। इसके बाद पुलिस का शक गहरा गया। अर्जुन की शादी को पांच साल हो गए थे। उसकी कोई संतान नहीं थी। पति पत्नी में अक्सर झगड़ों की एक वजह यह भी बताई जा रही है। शव कई दिन पुराना होने की वजह से पोस्टमार्टम में मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। उसका बिसरा प्रिजर्व किया गया है।
मौत की गुत्थी में कुछ और आ सकता है सामने
अपहरण की कहानी तो साफ हो गई है, लेकिन हत्या और आत्महत्या के बीच मामला अभी उलझा हुआ है। सूत्रों के अनुसार गर्मी में 15 घंटे तक लाश को छिपाए रखना आसान नहीं है। इस पूरे मामले में कुछ और लोगों के शामिल होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। अर्जुन का यहां से जाना, फिर तीन दिन बाद बरेली में खुद को पुलिस के हवाले करना। इस सब घटनाक्रम का राजदार कोई और भी हो सकता है। फिलहाल पुलिस अभी मामले की तह तक जाने की कोशिश में लगी है।