मनमानी कार्यप्रणाली के लिए बदनाम पुलिस का एक और चेहरा सामने आया है। ट्रैक्टर-ट्रॉली समेत दो लोगों के लापता होने के मामले में कोर्ट के बार-बार नोटिस के बाद भी पुलिस सुध नहीं ले रही। कोर्ट ने नोटिस जारी कर पुलिस से 16 मार्च को मामले की प्रगति आख्या दाखिल करने को कहा है। गंभीर मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। दो लोगों के लापता होने के मामले को भी पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया।
उझानी कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला गद्दी टोला निवासी कल्लू पुत्र बाबू मोहल्ले के ही शकील गाजी के ट्रैक्टर-ट्रॉली पर ड्राइवर था। छह मई 2009 को कल्लू ट्रैक्टर-ट्रॉली किराए पर लेकर गया था। इसके बाद भी वापस नहीं लौटा। मोहल्ले का ही मुजम्मिल पुत्र इकलास भी उसके साथा था। काफी तलाश के बाद भी पता नहीं लगा तो शकील ने 14 मई को उझानी कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई। जांच के बाद उझानी पुलिस ने 10 दिसंबर 2010 को मामले में एफआर लगा दी।
वादी शकील ने एफआर के खिलाफ प्रोटेस्ट किया। इस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने 14 फरवरी 2014 को एफआर खारिज कर फिर से विवेचना का आदेश दिया। जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई, लेकिन दो साल के बाद भी जांच आगे नहीं बढ़ी है। मामले में वादी ने प्रगति आख्या मांगी, लेकिन क्राइम ब्रांच ने अब तक प्रगति आख्या नहीं दी है। कोर्ट ने सुनवाई के लिए 16 फरवरी तय की है। गौर करने वाली बात यह है कि मय ट्रैक्टर-ट्रॉली के दो लोगों के लापता होने के मामले को भी पुलिस गंभीरता से नहीं ले रही। वादी की अर्जी पर कोर्ट ने पुलिस ने जांच की प्रगति आख्या तलब की है। इस मामले में सुनवाई अब 16 मार्च को होगी।