सात साल पहले गला दबाकर की गई थी हत्या
प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश नलिन कुमार श्रीवास्तव ने दहेज हत्या में नामजद मृतका के पति और सास को दोषी करार देते हुए दोनों को 10-10 साल कैद और 17-17 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। कोर्ट ने नामजद ननद, जेठ और चचिया ससुर को बरी कर दिया। दहेज हत्या का यह मामला साल साल पुराना है।
बिल्सी थाना क्षेत्र के गांव पिंडौल में सात साल पहले दहेज की मांग पूरी न होने पर विवाहिता की गला दबाकर हत्या कर दी गई थी। बिल्सी के गांव डल्लू नगला निवरासी दुर्गपाल कश्यप ने 13 अक्तूबर 2009 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि वह अपनी बहन शारदा की शादी बिल्सी के गांव पिंडौल निवासी राजेंद्र पुत्र रामबहादुर से की थी। ससुराली दहेज में बाइक और सोने की चेन की मांग तर रहे थे। मांग पूरी न होने पर 22 दिसंबर 2009 को पति राजेंद्र, सास रामश्री, ननद, जेठ और शारदा के चचिया ससुर ने मिलकर उसकी हत्या कर दी। न्यायाधीश नलिन कुमार श्रीवास्तव ने पत्रावली में मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन पक्ष के एडीजीसी प्रेमबाबू और बचाव पक्ष के वकीलों की जिरह सुनने के बाद राजेंद्र और रामश्री को दहेज हत्या का दोषी पाया। दोनों को कोर्ट ने 10-10 साल कैद और 17-17 हजार रुपया जुर्माना की सजा सुनाई। तीन आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।