पंद्रह दिन पहले उझानी कोतवाली में सिपाही गौरव टाइटलर की मनमानी का शिकार हुई छात्रा के मजिस्ट्रेट के सामने 164 के बयान शुक्रवार को नहीं हो सके। मामले की विवेचना कर रहे उझानी कोतवाल देवराज राठी ने छात्रा के बयान दर्ज कराने के लिए गुरुवार को कोर्ट में अर्जी दी थी। उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया था कि छात्रा के बयान अस्पताल में ही दर्ज करा लिए जाएं। मजिस्ट्रेट ने उनकी अर्जी खारिज कर दी थी। शुक्रवार को वह बयान दर्ज कराने के लिए छात्रा को लेने जिला अस्पताल पहुंचे लेकिन यहां डॉक्टर्स ने कहा कि छात्रा की स्थिति अभी ऐसी नहीं है कि उसे कहीं ले जाया जा सके।
बता दें कि 15 जनवरी को सिपाही गौरव टाइटलर ने छात्रा को रेप के बाद क्वार्टर की छत से फेंक दिया था। सिपाही को छात्रा की हत्या की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। बाद में उसे बर्खास्त कर दिया गया। गंभीर हालत में छात्रा बरेली के एक निजी अस्पताल में भर्ती रही थी। विवेचना के दौरान छात्रा ने 161 के बयान में अपने साथ रेप की बात कही थी। इसके बाद आरोपी सिपाही पर रेप और पाक्सो एक्ट की धाराएं तरमीम की गईं। पीड़िता को मंगलवार की रात बदायूं के जिला अस्पताल में शिफ्ट करा दिया गया था।
विवेचक का कहना है कि पुलिस कोई खतरा उठाना नहीं चाहती। जब तक डॉक्टर छात्रा को अस्पताल से कोर्ट तक ले जाने की इजाजत नहीं देते, तब तक बयान दर्ज होना मुश्किल है।
डीएनए जांच के लिए आरोपी के नमूने
बदायूं। मामले के आरोपी सिपाही गौरव टाइटलर की डीएनए जांच कराने के लिए शुक्रवार को सैंपल लिए गए। आरोपी को 17 जनवरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। उस वक्त पुलिस ने उसका मेडिकल तो कराया था लेकिन शरीर से डीएनए जांच के लिए सैंपल नहीं लिए गए थे। शुक्रवार को आरोपी कोर्ट में पेशी पर आया था। पुलिस ने उसके बाल, नाखून और ब्लड सैंपल लेने के लिए कोर्ट से इजाजत मांगी। कोर्ट ने इसे स्वीकार कर लिया। बाद में जिला अस्पताल में उसके नमूने लिए गए। यहां से उसे फिर से कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया।