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पुलिस पर कातिल को क्लीनचिट देने का आरोप

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हुसैनुपर खेड़ा के छुटकन ठाकुर हत्याकांड में घरवालों ने पुलिस की विवेचना पर सवाल उठाया है। मृतक के फौजी भाई समेत चश्मदीद लोग शुक्रवार को कोतवाली पहुंचे। उन्होंने बयान दर्ज कराके तत्कालीन विवेचक की भूमिका को संदिग्ध ठहराया। आरोप है कि नामजदों में से एक को क्लीनचिट दे दी गई है।
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पूर्वाह्न कोतवाली पहुंचे लोगों में मृतक के भाई सेना में सूबेदार पुरुषोत्तम सिंह ने कोतवाल देवराज राठी को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। बताया कि उसके भाई छुटकन ठाकुर की हत्या 28 नवंबर को खेत पर कर दी गई थी। हत्याकांड में उसके चचेरे भाई विजय कुमार ने आठ लोगों को नामजद कराया था लेकिन तत्कालीन विवेचक रामसूरत यादव ने नामजदों में से एक राजेश कुमार को फर्जी बयानों के आधार पर क्लीनचिट दे दी है। पुरुषोत्तम ने कोतवाल के सामने घटना के चश्मदीद भी पेश किए।
उस वक्त विवेचक ने जिन महिला और पुरुषों के बयान दर्ज कराए थे उनमें हुसैनपुर के सेवाराम ने तो कोतवाल के सामने स्पष्ट कर दिया कि राजेश तो घटना में शामिल था। बयान दर्ज कराने को पहुंचे लोगों में रणवीर सिंह, धीरज और पप्पू समेत घटना की रिपोर्ट लिखाने वाले विजय ने भी तत्कालीन विवेचक की भूमिका पर सवाल उठाया। सूबेदार पुरुषोत्तम ने बताया कि कोतवाल ने उसे सही ढंग से विवेचना करने का भरोसा दिलाया है। बता दें कि पुरुषोत्तम ने तत्कालीन विवचेक की शिकायत डीजीपी से लेकर आईजी तक से की थी।
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कनकपुर के लोग हैं राजेश के रिश्तेदार
उझानी। छुटकन ठाकुर की हत्या के मामले में तत्कालीन विवेचक ने दो महिलाओं समेत करीब छह लोगों के बयान दर्ज किए थे। उन्हीं बयान के आधार पर राजेश को यह कहकर क्लीनचिट दी गई कि घटना वाले दिन वह दातागंज क्षेत्र के गांव कनकपुर में एक कार्यक्रम में था। जबकि कनकपुर में उस दिन कोई कार्यक्रम ही नहीं हुआ था।
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