भागने की फिराक में थे, लालपुल के पास धरे गए
12 लोगों को हत्याकांड में कराया गया था नामजद
इंस्पेक्टर कोतवाली मनोज कुमार सिंह ने दावा किया कि बाकी आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
हिस्ट्रीशीटर नईम उर्फ राजा की 20 अक्तूबर को मीट मार्केट के पास स्थित छोटी सराय में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। फायरिंग में नईम का साथी सलीम और एक अन्य युवक इब्राहीम घायल हो गए थे। नईम को पांच गोलियां मारी गई थीं। हिस्ट्रीशीटर के भाई फहीम ने मोहम्मद हाशिम, अकरम उर्फ नन्ना, अमजद, शराफत, लखन पुत्र शराफत, अजनाजा पुत्र शराफत हुसैन, शब्बू पुत्र शराफत हुसैन, अनवार, मुन्ना पुत्र अनवार, आंशू पुत्र अनवार निवासी मोहल्ला खंडसारी, जहांगीर, शकील निवासी शेखूपुर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने हाशिम, अमजद और अकरम को लालपुल के पास से उस समय गिरफ्तार कर लिया जब वह भागने की योजना बना रहे थे। आरोपियों के पास से दो तमंचे भी बरामद हुए हैं। हाशिम ने एक तमंचा घटना के बाद वहीं फेंक देने की बात कही। पुलिस ने तीनों आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया। यहां से तीनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
ऑटोमेटिक हथियार नहीं मिला
नईम की हत्या में ऑटोमेटिक हथियार का इस्तेमाल हुआ था। फिलहाल पुलिस इसे बरामद नहीं कर सकी है। इलाके के लोगों की मानें तो हमलावरों ने नईम पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थीं। नईम आगे भाग रहा था और हमलावर उसके पीछे थे। हत्या में रिवाल्वर का भी इस्तेमाल हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यह बात साफ हो गई थी। वह तक वह हथियार पुलिस को नहीं मिला है।
तमंचा तलाश करने छोटी सराय पहुंची पुलिस
गिरफ्तार हमलावरों ने पूछताछ के दौरान पुलिस को एक तमंचा घटना के बाद छोटी सराय इलाके में ही नाले में फेंक देने की बात बताई। इसके बाद पुलिस छोटी सराय पहुंची। यहां काफी देर तक तमंचा तलाश किया जाता रहा, लेकिन पुलिस को कामयाबी नहीं मिली।
प्लाट ने अपनों को ही बना दिया दुश्मन
हत्यारोपी हाशिम हिस्ट्रीशीटर नईम का सगा चाचा है। हासिम का अपने भाई और नईम के पिता कासिम से एक प्लाट को लेकर विवाद चल रहा था। सबसे पहले 2003 में हाशिम की ओर से कासिम के खिलाफ घर में घुसकर तोड़फोड़ करने का मुकदमा लिखाया गया था। इसके बाद नवंबर 2013 में नईम ने मोहल्ला खंडसारी में ही रहने वाले रामगोपाल और उनकी बहन शांति देवी की हत्या कर दी। हाशिम के परिवार को फंसाने के लिए नईम ने अपने चचेेरे भाई अकरम की आईडी घटना स्थल पर छोड़ दी थी। बाद में घटना का खुलासा हो गया। पुलिस ने हाशिम और उसके परिवार वालों को इस हत्याकांड में नईम के खिलाफ गवाह बना दिया। नईम ने यह हत्या जेल में बंद रहने के दौरान की थी। वह बीमारी के बहाने जिला अस्पताल में भर्ती हुआ। यहां से मौका पाकर निकल गया और डबल मर्डर करके फिर अस्पताल में आ गया था।