बिनावर थाने के सेमरमई में चल रहे अवैध नखासे से ज्यादातर पशुओं की खरीद फर्जी आईडी लगाकर की गई थी। जांच में यह बात सामने आ रही है। इसी वजह से पुलिस को बड़े पशु तस्करों तक पहुंचने में देरी हो रही है। हालांकि अफसर कह रहे हैं कि जरूरी हुआ तो जेल भेजे गए पशु तस्करों की रिमांड लेकर उनसे पूछताछ की जाएगी।
पांच-छह फरवरी की रात बिसौली, वजीरगंज और सिविल लाइंस थाना पुलिस ने अभियान चलाकर गोवंश के पशुओं से भरे 78 वाहन पकड़े थे। वाहनों से 233 पशु बरामद हुए। सौ लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेज गया था। इन पशुओं को सेमरमई के अवैध नखासे से रामपुर और मुरादाबाद ले जाया जा रहा था। भंड़ाफोड़ होने के बाद प्रशासन ने अवैध नखासे पर पाबंदी लगा दी थी। बड़े पशु तस्करों को ट्रेस करने के लिए पुलिस की चार टीमें भी बनाई गईं। अब तक पुलिस को कुछ ज्यादा हाथ नहीं लगा है। जांच के दौरान अब यह बात सामने आई है कि पशुओं को खरीदने में लगाए गए ज्यादातर पहचान पत्र भी फर्जी हैं। फर्जी पहचान पत्रों के जरिए गोवंश के पशुओं की खरीद का मामला सामने आने के बाद साफ हो गया है कि पशुओं की तस्करी ‘प्री प्लानिंग’ के तहत की जा रही थी।
फर्जी आईडी के जरिए पशुओं की खरीद की बात सामने आ रही है। पुलिस मामले में जांच कर रही है। नखासों के लिए लाइसेंस जिला पंचायत जारी करता है। अगर प्रशासन या जिला पंचायत की ओर से अवैध नखासे के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए कहा जाता है तो मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
-अनिल यादव, एसपी सिटी