गौरतलब है कि दिल्ली के वसंत बिहार इलाके में 16 दिसंबर 2012 को चलती बस में गैंगरेप के बाद नृशंस हत्या की वारदात ने पूरे देश को झकझोर दिया था। मामले का एक आरोपी बदायूं के इस्लामनगर थाने के एक गांव का था। घटना के वक्त वह आरोपी नाबालिग था। जुवेनाइल कोर्ट में ट्रायल के बाद उसे तीन साल के लिए बाल सुधार गृह भेज दिया गया था। अब इस दोषी की सजा की अवधि पूरी हो रही है।
10 साल पहले छोड़ गया था घर
इस्लामनगर। दिसंबर 2012 में निर्भया कांड से जिले का नाम जुड़ने के बाद सबकी नजरें नाबालिग के परिवार पर टिक गईं। हालांकि, आरोपी 10 साल पहले ही नौकरी करने दिल्ली चला गया था। कुछ समय तक वह परिवार का खर्च चलाने के लिए रुपये भी भेजता रहा। बाद में उसने परिवार से पूरी तरह से नाता तोड़ दिया। मानसिक रोगी पिता परिवार पालने में सक्षम नहीं था, जबकि उसके घर में दो छोटी बहनें और तीन छोटे भाई भी थे। अक्सर बीमार रहने वाली मां तंगहाली के बावजूद किसी तरह परिवार को पाल रही है।