फर्जी बैंक खातों से 70 लाख रुपये के लेनदेन मामले में करीब दो महीने की पड़ताल के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह खाते फर्जी आईडी से सहसवान की एसबीआई मेन ब्रांच में खोले गए थे। जुलाई में मामला पकड़ में आया था और तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। फर्जी बैंक खातों से लेनदेन का भंडाफोड़ होने के बाद बैंक प्रबंधन के साथ पुलिस और खुफिया इकाइयों में भी खलबली मच गई थी।
सहसवान तहसील के गांव मोहम्मदपुर ऊधा के आकाश पुत्र हरीश चंद्र, अशोक पुत्र जानकी, आकाश कुमार पुत्र रमेश बाबू, बबलू पुत्र पप्पू, मुकेश पुत्र विजय पाल, अशोक पुत्र नत्थू सिंह, वीरेंद्र पुत्र प्रानसुख और देवकरन पुत्र सोहन लाल के नाम कस्बे की एसबीआई मेन ब्रांच में बचत खाते हैं। एक मई से एक जुलाई तक इन खातों में 70 लाख रुपये का लेनदेन हो गया। बचत खातों में इतना बड़ा लेनदेन होने की जानकारी पर बैंक प्रबंधन ने खाता धारकों को नोटिस जारी किया। कहा गया कि बचत खातों से इतना बड़ा लेनदेन नियमानुसार नहीं है। इसके लिए खातों को करंट एकाउंट में तब्दील कराएं।
नोटिस मिलने के बाद यह सभी लोग बैंक पहुंचे। शाखा प्रबंधक को बताया कि उनका कोई खाता इस बैंक में नहीं है। इसके बाद खातों की पड़ताल की गई, तब पता लगा कि इन खातों को खोलने के लिए आईडी तो इन्हीं लोगों की लगी हैं, लेकिन फोटो और हस्ताक्षर दूसरे लोगों के हैं। मामले में शाखा प्रबंधक भूपेंद्र कुमार गुप्ता की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। मामले में तीन लोगों को जेल भेज दिया गया था। दो महीने की जांच के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है।
इस तरह पकड़े गए थे फर्जीवाड़ा करने वाले
बदायूं/सहसवान। एसबीआई मेन ब्रांच सहसवान में 19 अप्रैल को तीन युवक खाता खुलवाने पहुंचे। शक होने पर बैंक अफसरों ने इनसे पूछताछ की तो यह लोग कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद तीनों यहां से भाग गए। बैंक प्रबंधन ने खबर पुलिस को दे दी। इसके बाद तीनों युवक फर्जी आईडी पर खाता खुलवाने शहवाजपुर ब्रांच पहुंचे। यहां उवैश रजा पुत्र महरुल मोहम्मद इशहाक निवासी उदयवीर थाना वजीरगंज, अब्दुल कादिर पुत्र मोहम्मद सुलेमान और फरीद आलम पुत्र शमकीद अहमद को दबोच लिया गया।
मामले में जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। पड़ताल में पता लगा है कि लेनदेन करीब 70 लाख रुपये का हुआ है। फर्जी बैंक खातों से 35 लाख रुपये निकाले गए हैं। 2.50 करोड़ रुपये के लेनदेन की बात झूठी निकली है।
-अरविंद कुमार यादव, उपनिरीक्षक, विवेचक