जिस नौकर को घर में काम दिया, जिससे कि उसकी रोजी रोटी चल सके। उसी नौकर ने दगा करके मालिक के बेटे का अपहरण कर लिया। आखिरकार सात साल के बाद उस नौकर को उसकी दगा की सजा भी जज ने सुना दी। मालिक के बेटे और उसके पड़ोसी बच्चे का अपहरण करने वाले इस नौकर को डकैती जज ने सात साल बाद उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। इससे मालिक के घरवालों को सुकून मिला कि दगा करने वाले को आखिर सजा मिल ही गई।
वजीरगंज थाना क्षेत्र के कतगांव के वादी विपिन कुमार ने नौ अक्तूबर 2008 को दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि उसका छह साल का बेटा सुरजीत और पड़ोस का सौरभ चाय देने के लिए गए थे और वापस घर नहीं लौटे। जब उसने ट्यूबवेल पर जाकर देखा तो उसका आरोपी नौकर और दोनों बच्चे नहीं मिले। अगले दिन विपिन के मोबाइल पर बच्चों को जिंदा सही सलामत पाने के एवज में आठ लाख रुपये फिरौती के मांगे।
मामले की जांच कर रही थाना पुलिस ने 20 अक्तूबर 2008 को मुखबिर की सूचना पर रजलामई गांव के ईख के खेत में आरोपी रामकिशोर के साथ मुठभेड़ के बाद बच्चों को मुक्त करा लिया था। स्पेशल जज डकैती कोर्ट पंकज अग्रवाल ने दो बच्चों का अपहरण करने वाले इस आरोपी के मामले में पत्रावलियों का अवलोकन करने, सरकारी वकील ज्ञानस्वरूप गुप्ता और बचाव पक्ष की तमाम दलीलों को सुनने के बाद आरोपी नौकर रामकिशोर उर्फ तोताराम निवासी सरौत उझानी को दोषी पाकर उम्र कैद की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।