स्पेशल जज एससी एसटी एक्ट अशोक कुमार सप्तम ने जानलेवा हमले में दोषी पाए जाने पर पिता-पुत्र को सात-सात साल की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। यह घटना करीब साढ़े नौ साल पहले थाना अलापुर क्षेत्र के गांव कटिया में हुई थी। गांव निवासी टीकाराम पुत्र मूलचंद्र ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके गांव के प्रधान पति रामचरन पुत्र नत्थू बहुत ही दबंग प्रवृत्ति का व्यक्ति है। रामचरन और उसका पुत्र देव सिंह उर्फ गुड्डू अक्सर शराब पीकर राहगीरों के साथ गाली-गलौज करता था। वादी टीकाराम आठ सितंबर 2008 को रात करीब आठ बजे दुकान से सामान लेकर अपने घर जा रहा था कि तभी रामचरन और उसके पुत्र देव सिंह उर्फ गुड्डू ने उसे देखकर गालियां देनी शुरू कर दीं। विरोध करने पर मुजरिम रामचरन अपनी बंदूक निकाल लाया। जान से मारने की नीयत से फायर कर दिया। जिससे टीकाराम गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर पिता-पुत्र के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
स्पेशल जज अशोक कुमार सप्तम ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी रईस अहमद और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद रामचरन और उसके पुत्र देवसिंह उर्फ गुड्डू को मुजरिम करार देते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया।