प्रमुख सवाल, पप्पू यादव पर पाक्सो एक्ट की कार्रवाई क्यों नहीं?
सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट में पेज नंबर 11 पर जिक्र है कि पप्पू यादव और बड़ी लड़की के बीच संबंध थे। दोनों के बीच फोन पर बात होती थी। पेज नंबर 12 पर पैरा 16.6 में लिखा है कि घटना वाली रात पप्पू यादव को बड़ी लड़की के साथ नग्न और आपत्तिजनक हालत में देखा गया था। पप्पू और मुख्य गवाह बाबूराम उर्फ नजरू के बीच हाथापाई भी हुई। वादी पक्ष ने इस बिंदु को मुद्दा बनाया। कहा, लड़की नाबालिग थी और पप्पू यादव बालिग। अगर दोनों को नग्न और आपत्तिजनक स्थिति में देखा गया तो पप्पू यादव को क्लीेनचिट क्यों ? पप्पू यादव को 7/8 पाक्सो एक्ट का आरोपी क्यों नहीं बनाया गया ? इस मुद्दे पर सीबीआई भी जवाब नहीं दे सही।
दूसरा बिंदु दोबारा पोस्टमार्टम का था। वादी पक्ष के वकील एचएस नकवी और ज्ञान सिंह शाक्य की मानें तो बिना दोबारा पोस्टमार्टम के सीबीआई कैसे तय कर सकती है कि लड़कियों ने खुदकुशी की, उनके साथ गैंगरेप नहीं हुआ। इन्हीं मुद्दों पर सीबीआई घिरती चली गई और 17 महीने बाद स्पेशल जज पाक्सो एक्ट वीरेंद्र पांडेय ने देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी को जोरदार झटका देते हुए क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया। क्रिमिनल लॉयर, पवन कुमार गुप्ता का कहना है, क्लोजर रिपोर्ट खारिज ही होनी थी। जहां तक मेरी जानकारी में है सीबीआई ने पहलुओं को दरकिनार कर दिया था। पप्पू यादव को पाक्सो एक्ट में आरोपी बनाया जाना चाहिए था।