नारकोटिक्स व सेड्यूल एच1 की दवाओं का कारोबार करने वाला व्यापारी फरार हो गया है। व्यापारी ने जिस नाम व पते से दवा का लाइसेंस लिया था वह जांच में फर्जी मिला है।
पुलिस व्यापारी द्वारा दिए गए पते पर तीन बार गई, मगर बैरंग लौट आई। अब खाद्य एवं औषधि विभाग दवा व्यापारी की फर्म पर लाइसेंस निरस्तीकरण का नोटिस चस्पा करने की तैयारी में हैं।
दो माह पूर्व 31 अगस्त को ड्रग इंस्पेक्टर यूबी सिंह मुकेरीटोला स्थित सोनू फार्मा पर छापेमारी कर पांच लाख रुपये से अधिक की प्रतिबंधित दवाओं को जब्त किया था।
सोनू फार्मा के मालिक मोइन अहमद खान पुत्र मोबीन अहमद ने रेलवे कॉलोनी के पते पर फार्मा का लाइसेंस लिया था और दवाओं का गोदाम कैंडी हॉस्पिटल के ऊपर बनाया था।
छापेमारी के दौरान मोइन खान नारकोटिक्स एक्ट के दायरे में आने वाली दवाओं का कोई भी दस्तावेज नहीं दिखा पाया। इन दवाओं को कहां से मंगाया जा रहा था वह भी नहीं बताया।
गोदाम से ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन, अल्पराजोलम टेबलेट, पराजोलम और पेंटाविन जैसी 10 प्रकार की प्रतिबंधित दवाओं का जखीरा बरामद हुआ। गोदाम में जो दवाएं पकड़ी गई इन दवाओं का कोई दस्तावेज ड्रग के कारोबारी के पास नहीं था।
स्थानीय बाजार में किन मेडिकल स्टोरों को यहां से दवाएं आपूर्ति की जाती थी, वह भी नहीं बताया। ड्रग इंस्पेक्टर ने दवा व्यापारी के खिलाफ नगर कोतवाली में नारकोटिक्स एक्ट के तहत केस दर्ज कराया था।
साथ ही दवा व्यापारी के खिलाफ हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच में मुकदमा भी दायर किया था। दवा व्यापारी के गिरफ्तारी के लिए पुलिस जब रेलवे कॉलोनी पहुंची तो स्थानीय लोगों ने बताया कि वह तीन वर्ष पहले ही मकान खाली कर चला गया है।
और तो और ड्रग विभाग से भी व्यापारी के नाम पते पर जो नोटिस भेजा गया वह बैरंग लौट आया। इस बाबत ड्रग इंस्पेक्टर यूबी सिंह ने बताया कि दवा का कारोबार करने वाला मोइन अहमद ने हर कदम पर हेराफेरी की है।
उसके द्वारा दर्शाया गया पता फर्जी है। विभाग से जितने नोटिस भेजे वह लौट आए। अब अंतिम रूप से सोनू फार्मा का लाइसेंस निरस्त करने की सूचना दुकान पर चस्पा कर दी जाएगी।