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नौकरी मिली नहीं, कानूनी शिकंजे में फंस गए

Thu, 03 Aug 2017 11:10 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं।
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क‌िसान - फोटो : अमर उजाला
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मेडिकल कॉलेज को जमीन देकर पछता रहे, 2014 से नौकरी पाने को भटक रहे हैं किसान 
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उझानी रोड पर गुनौरा वाजिदपुर के पास निर्माणाधीन राजकीय मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन देने वाले तीन गांवों के 226 किसान अब पछता रहे हैं। भूमि अधिग्रहण से पहले किसानों को भरोसा दिया गया था कि प्रत्येक किसान को मुआवजे के साथ उनके परिवार के एक सदस्य को मेडिकल कॉलेज में नौकरी दी जाएगी। उनकी जमीन का 2014 में अधिग्रहण किया गया था। इस मेडिकल कॉलेज की ओपीडी अक्तूबर 2016 में शुरू हो चुकी है। जमीन देने वाले 226 में सिर्फ 24 किसानों के परिवार के एक-एक सदस्य को नौकरी मिल पाई है। बाकी 202 किसान कॉलेज में नौकरी पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। नौकरी पाने के लिए किसानों ने धरना प्रदर्शन किया तो उन्हें मुचलका पाबंद कर कानूनी शिकंजे में फंसा दिया गया।        
सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 20 दिसंबर 2013 को गुनौरा वाजिदपुर गांव के पास राजकीय मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास किया था। 245 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले राजकीय मेडिकल कॉलेज के लिए नौशेरा, शेखूपुर और गुनौरा वाजिदपुर के 226 किसानों की करीब 187 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था। मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण करने के समय प्रशासन ने किसानों को मुआवजे के साथ प्रत्येक किसान के परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का वायदा किया था। इन किसानों को मुआवजा तो मिल गया, लेकिन 202 किसानों को नौकरी अब तक नहीं दी गई। दिसंबर 2016 में इन किसानों ने भाकियू के बैनर के साथ नौकरी की मांग को लेकर करीब एक महीने तक मेडिकल कॉलेज में धरना दिया था। आवाज दबाने के लिए इनको मुचलका पाबंद कर दिया गया। किसानों को नौकरी मिली नहीं और जब हक मांगा को उनको कानूनी शिकंजे में फंसा दिया गया। ऐसे में किसान मेडिकल कॉलेज को जमीन देकर अब पछता रहे हैं।        
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नौकरी के नाम पर सरकार ने किया धोखा      
मेडिकल कॉलेज के जमीन लेने से पहले भरोसा दिया गया था कि परिवार के एक सदस्य को नौकरी भी दी जाएगी। मेडिकल कॉलेज में भर्तियां कर ली गईं हैं। गांव में सिर्फ एक दो लोग को ही अब तक नौकरी मिली है। सरकार ने नौकरी के नाम पर धोखा किया है। 
- गुड्डो देवी पत्नी प्रेमपाल       
     
जमीन भी और नौकरी भी नहीं मिली       
उम्मीद थी कि मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन देने के बाद परिवार के किसी सदस्य को सरकारी नौकरी मिल जाएगी। जमीन भी चली गई और नौकरी भी नहीं मिली। कुछ जमीन बची है उससे और मेहनत-मजदूरी के जरिए अब परिवार किसी तरह गुजारा कर रहा है। 
- रामदेई पत्नी अभिलाख       

भविष्य संवारने को दी थी सरकार को जमीन       
सरकार को जमीन देकर लगा था कि परिवार के किसी सदस्य को नौकरी मिल जाएगी और उसका भविष्य संवर जाएगा, लेकिन धोखा हो गया। नौकरी की मांग को लेकर आंदोलन किया तो मुचलका पाबंद कर दिया गया। इस तरह की हिटलरशाही ठीक नहीं होती।       
- सूबेदार       

पूरे खानदान की जमीन चली गई, नौकरी नहीं मिली       
खानदान में करीब 22 लोगों की जमीन मेडिकल कॉलेज के लिए सरकार ने ले ली। किसी के पास जमीन नहीं बची है। इतना ही नहीं किसी को नौकरी भी नहीं मिली। अब सबसे सामने गुजारा करने के लिए सिर्फ मेहनत और मजदूरी के अलावा कोई विकल्प नहीं है। 
- कैलाश कश्यप       
  
किसानों के हक के लिए जारी रहेगा संघर्ष        
किसानों के हक की लड़ाई जारी रहेगी। किसान यूनियन ने पहले भी धरना दिया था। पूर्ववर्ती सरकार ने किसानों के साथ वादाखिलाफी की है। जब तक किसानों के परिवारों को नौकरी नहीं मिलेगी किसान यूनियन शांत नहीं बैठेगी। 
-राजेश सक्सेना, किसान नेता       

जल्द मिल सकती हे मेडिकल कॉलेज को मान्यता       
बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज को मान्यता भी जल्द मिल सकती है। मेडिकल कॉलेज के नोडल अधिकारी डॉ. एमसी प्रजापति की मानें तो अगले दो साल में यहां एमबीबीएस की कक्षाएं लगनी भी शुरू हो जाएंगी। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया में मान्यता के लिए फिर से आवेदन कर दिया गया है। जल्द ही एमसीआई का दौरा होने की उम्मीद है। बता दें कि पिछले साल एमसीआई टीम ने दौरा करने के बाद मेडिकल कॉलेज को मान्यता देने से इंकार कर दिया था।        
     
दिन में मरीजों को भर्ती करने की सेवाएं शुरू       
बदायूं। मेडिकल कॉलेज में ओपीडी सेवाएं अक्तूबर 2016 में ही शुरू हो चुकी हैं। अब यहां दिन में मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था भी कर दी गई है। हालांकि, रात में मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था अभी नहीं है। नोडल अधिकारी डॉ. एमसी प्रजापति के मुताबिक अगले महीने से मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी सेवाएं शुरू हो जाएंगी। इसके बाद यहां रात में भी मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था हो जाएगी। फिलहाल यहां स्टाफ की भी कमी है।        
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मेडिकल कॉलेज को जमीन देने वाले किसानों के परिवार के सदस्यों को नौकरी देने संबंधी जानकारी मेरे संज्ञान में नहीं है। मैनें कुछ दिन पहले ही में चार्ज संभाला है। पता लगा है कि किसानों ने आंदोलन भी किया था। इस संबंध में पूर्ववर्ती नोडल अधिकारी ने भी कोई जानकारी नहीं दी थी। मेडिकल कॉलेज में जो भर्तियां हुई हैं वह भी मेरे समय की नहीं हैं।
-डॉ. एमसी प्रजापति, नोडल अधिकारी राजकीय मेडिकल कॉलेज
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