पिछले कुछ दिन से धान की पौध देखकर झमाझम बरसात का इंतजार कर रहे किसानों की मुराद इंद्रदेव ने मंगलवार को पूरी कर दी। दोपहर में थोड़ी देर ही सही झमाझम बारिश होने से किसानों के चेहरे खिल गए, वहीं शहर में निचले इलाकों में पानी भर जाने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
वैसे तो कई दिन से काले बादल छाए हुए थे। सोमवार को बरसात हुई तो धान की रोपाई के लिए तैयार खेतों को जैसे संजीवनी मिल गई। मंगलवार को सूरज से बादलों की लुकाछिपी चलती रही। अचानक दोपहर में तेज बारिश होने से किसानों ने अपने खेतों की ओर रुख किया। धान की रोपाई तेजी से शुरू कर दी। इधर, बरसात ने शहरवासियों को तापमान से तो राहत दिलाई, लेकिन उनकी दु्श्वारियां भी बढ़ा दीं। जलभराव होने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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इलाके में धान की रोपाई का काम शुरू
उझानी। धान की रोपाई का वक्त जुलाई तक है लेकिन पौध पिछले महीना ही तैयार हो जाने की वजह से किसानों के सामने दुविधा का माहौल बन गया था। बहुत कम ही किसानों ने निजी संसाधनों का इस्तेमाल कर रोपाई शुरू करा दी थी। सोमवार से मंगलवार शाम तक रुक रुक हुई झमाझम बरसात ने उन सभी काश्तकारों को रोपाई के काम में जुटा दिया जिनके सामने निजी संसाधनों का इस्तेमाल करने में आर्थिक मजबूरी आड़े आ रही थी। काश्तकारों में फतेहपुर के राजपाल ने बताया कि अचानक तेजी से हुई बरसात से लगता है कि इंद्रदेव इस बार धान उत्पादकों की मुराद पूरी कर देंगे।
बता दें कि धान की पौध 21 से 25 दिन में तैयार हो जाती है। रोपाई का काम जुलाई लास्ट तक चलेगा। हालांकि अगेती धान की पहले ही रोपाई का काम पूरा हो चुका है। धान की फसल करीब चार महीना में पक कर तैयार हो जाती है। मानसून ने रुक रुक कर रफ्तार पकड़ी तो उत्पादन भी अच्छा रहेगा।वैसे, पिछले महीना मौसम का मिजाज देख किसानों का धान की ओर से मोहभंग होने लगा था। कृषि वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार ने बताया कि धान उत्पादकों को रोपाई के काम में देरी नहीं करनी चाहिए। लेट रोपाई से उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
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जड़ों में पहुंचा सूत्रकृमि परजीवी
पौध में इन दिनों पीलापन नजर आने लगा है। तीन दिन पहले कृषि वैज्ञानिक संजय कुमार ने खेतों की ओर रुख किया तो धान की पौध के पत्तों पर साइड इफेक्ट महसूस किया। बोले- पौध की जड़ में सूत्रकृमि परजीवी का साया पड़ गया है। इसकी रोकथाम के लिए किसानों को चाहिए कि वह पीले पत्ते वाली पौध में दो किलोग्राम प्रति बीघा की दर से फ्यूराडान का इस्तेमाल करें। फ्यूराडान से सूत्रकृमि परजीवी नष्ट हो जाएगा।