विस्तार से सुनाए गए फैसले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने कहा आईपीसी की संशोधित धारा 375(पांच) के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु की स्त्री के साथ उसकी सहमति अथवा असहमति से यौन शोषण बलात्कार है क्योंकि मेडिकल में उसकी आयु 17 साल है तथा हाईस्कूल शैक्षिक प्रमाणपत्र में जन्मतिथि 18 वर्ष से कम है। यद्यपि पीड़िता ने अपने कलमबंद बयानों में थाना कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला ब्राह्मपुर निवासी सैफुद्दीन उर्फ सैफी से मुस्लिम धर्म अपनाकर बरेली में स्वेच्छया से निकाह करना स्वीकार किया है तथा स्वेच्छया से लड़का पैदा होने के तथ्य के संबंध में शपथपत्र दिया है। कोर्ट ने कहा पीड़िता को उसके पिता की सुपुर्दगी में दिए जाने के उपरांत पुन: आरोपी द्वारा उसके माता,भाई को विषाक्त पदार्थ सुंघाकर अवयस्क पीड़िता का अपहरण किया जाना गंभीर अपराध है। इसके चलते कोर्ट ने आरोपी सैफी उर्फ सैफुद्दीन की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।