जिला महिला अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद उसके परिवारवालों ने हंगामा किया। आरोप लगाया कि डॉक्टर ने इलाज में लापरवाही की है। बाद में पहुंची कोतवाली पुलिस ने मामले को शांत कराया। रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कोतवाली पुलिस को तहरीर दी गई है। बिल्सी थाने के गांव जिनौरा निवासी गोविंद ने अपनी पत्नी रेखा (23) को जिला महिला अस्पताल में एक जुलाई को प्रसव के लिए भर्ती कराया था। यहां अगले दिन बड़े ऑपरेशन से रेखा ने पुत्र को जन्म दिया। इसके बाद से उसका अस्पताल में इलाज चल रहा था। रेखा के परिवारवालों का कहना है कि शुक्रवार रात उसकी तबियत बिगड़ने लगी। वह लोग कई बार डॉक्टर को बुलाने गए, लेकिन कोई डॉक्टर उसे देखने नहीं आया। शनिवार सुबह इलाज के अभाव में रेखा ने दम तोड़ दिया। इससे गुस्साए रेखा के परिवारवालों ने अस्पताल में हंगामा किया। इस दौरान डाक्टर और स्टाफ यहां से भाग गया। बाद में पुलिस आई तो सभी को समझा-बुझाकर शांत कराया गया। रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर दे दी गई है।
मनमानी नहीं छोड़ रहे अस्पताल के डॉक्टर
बदायूं। महिला अस्पताल के डॉक्टर मनमानी नहीं छोड़ रहे। लोगों का आरोप है कि बाकी का स्टाफ प्रसूताओं के परिजनों से उगाही में जुटा रहता है। इस रकम का बंटवारा सभी में होता है। रेखा के परिवार वालों का कहना था कि जिला महिला अस्पताल में तीन शिफ्ट में डॉक्टरों की ड्यूटी होती है। अगर कोई डॉक्टर अपनी शिफ्ट में किसी का ऑपरेशन कर देता है, तो अगली शिफ्ट में आने वाला डॉक्टर उसके इलाज में लापरवाही करता है। यही रेखा के साथ हुआ। रेखा का ऑपरेशन गायनी सर्जन डॉ. हाकिम सिंह ने किया था। ड्यूटी बदलने के बाद डॉ. शोभा अग्रवाल आ गईं।
महिला का ऑपरेशन मैंने किया था। वह पूरी तरह से स्वस्थ थी। अगर उसकी हालत बिगड़ी थी तो उसे हायर सेंटर के लिए रात में ही रेफर भी किया जा सकता था। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने ऐसा नहीं किया। - डॉ. हाकिम सिंह, गायनी सर्जन