चार बच्चों की डूबकर मौत होने का मामला...
एक ही स्थान पर 15 फीट तक किया गया अवैध खनन
बारिश का पानी जमा होने से बन गया यहां पर तालाब
गंगा की कटरी होने के चलते यहां मिट्टी के नीचे रेत
खनन माफिया की करामात है कि पुलिस और प्रशासन की आंखों में धूल झोंक कर चार बीघा खेत में करीब 15 फीट तक खनन कर लिया गया। खेत में लगातार हुई खुदाई से कई गड्ढे भी बन गए हैं जहां गहराई का पता लगाना मुश्किल है। बारिश का पानी जमा होने से यहां तालाब बन गया। अक्सर गांव के बच्चे तालाब में नहाने चले जाया करते हैं। बारिश की वजह से तालाब का जलस्तर बढ़ गया था। इसका आभास चारों लड़कों को नहीं था।
गांव रसूला के भोजराज और नेकसू सगे भाई हैं। गांव के पूरब की ओर स्थित इनका चार बीघा का खेत है। कई साल पहले दोनों भाइयों ने इस खेत को खुदाई के लिए दे दिया था। इसके बाद से खनन माफिया यहां से मिट्टी उठा रहे थे। इस पर किसी की नजर नहीं थी कि कितनी गहरी खुदाई हो रही है। यहां करीब 15 फीट तक खनन हो चुका है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि इतने बड़े रकबे में इतनी गहराई तक रेत और मिट्टी का खनन करने वालों के हौसले कितने बुलंद थे और खनन रोकने के जिम्मेदार कितने लापरवाह। इस खेत से मिट्टी का इतना खनन किया गया कि यहां से रेत भी निकलने लगी। गंगा की कटरी होने के कारण इस क्षेत्र के खेतों में तीन से चार फुट की खुदाई के बाद रेती भी निकलने लगती है। ग्रामीणों का कहना है कि इस खेत से खनन की गई रेत पास के दो स्कूलों में सप्लाई की जा रही थी। इतनी गहराई तक खुदाई के बाद इस खेत में बारिश का पानी जमा होने से तालाब बन गया था। अक्सर गांव के बालक इस तालाब में नहाने जाया करते थे। शनिवार को भी सुखवीर, सुनील, पुष्पेंद्र और पूरन तालाब में नहाने गए थे। बारिश की वजह से तालाब लबालब हो चुका था। बच्चों को गहराई का आभास नहीं हुआ और वह डूबने लगे।
पोस्टमार्टम के लिए सीओ ने राजी किया परिवार को
मुजरिया। तीनों लड़कों के परिवार वालों ने पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया था। बाद में मौके पर पहुंचने सीओ सहसवान उमेश यादव ने परिवार वालों से बात करके इनको पोस्टमार्टम के लिए राजी कराया। पोस्टमार्टम होने के बाद इनके परिवार वालों को मुख्यमंत्री सहायता कोष से आर्थिक मदद की प्रशासन की ओर से संस्तुति की जाएगी।
केदार के घर में बचा सिर्फ एक मानसिक मंदित बेटा
मुजरिया। केदार के चार बेटों में सुनील, सुखवीर और पुष्पेंद्र को तालाब ने निगल लिया। उसके परिवार में अब सबसे बड़ा बेटा प्रदीप (17) बचा है। प्रदीप मानसिक मंदित है। हादसे में तीन बेटों की मौत से केदार के परिवार में कोहराम है। सबसे बड़ी बेटी दुर्गेश की वह शादी कर चुका है। परिवार की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं है। भूमिहीन केदार मजदूरी कर परिवार का पेट पालता है।
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एक साथ चार मौतों से गांव में शोक
मुजरिया। रसूला के ग्रामीणों को विश्वास नहीं हो रहा है कि दो परिवारों के चार हंसते खेलते बच्चे उनसे दूर हो गए हैं। परिवारों में तो कोहराम मचा ही है वहीं गांवों में भी शोक है। एक साथ चार बच्चों की मौत से गांव में किसी के घर चूल्हा नहीं जला। मरने वालों में तीन सगे भाई हैं। केदार के चार में से तीन बेटे एक साथ काल कवलित हो गए। उसके परिवार को संभालना मुश्किल हो रहा था। वहीं गंगा सहाय के परिवार में दो बेटे थे। मृतक पूरन छोटा बेटा था। बड़ा बेटा चरनलाल भाई की मौत से गुमसुम हो गया। ग्रामीण केदार और गंगा सहाय के घर पर मौजूद थे।