चोरी के अल्कोहल से ‘डेथ ड्रिंक’ तैयार किया जा रहा है। गुजरात से उत्तर प्रदेश की केमिकल इंडस्ट्रीज के लिए टैंकरों में भरकर आने वाले मिथाइल अल्होकल की चोरी हाईवे किनारे के ढाबों पर की जा रही है। इससे बनने वाली शराब मौत का सामान हो जाती है।
गुजरात से मिथाइल अल्कोहल लेकर आने वाले टैंकर झांसी से ग्वालियर, आगरा और मथुरा रूट से यूपी में प्रवेश करते हैं। जबकि दूसरा रास्ता दिल्ली-लखनऊ हाईवे है। इन टैंकरों से सड़कों के किनारे स्थिति छोटे-छोटे ढाबों पर मिथाइल अल्कोहल निकाल लिया जाता है।
इससे बनने वाली शराब पूरी तरह से जहर हो जाती है। पीने के पांच मिनट में ही आंखों की रोशनी चली जाती है और थोड़ी देर में मौत हो जाती है। बताया जाता है कि टैंकर चालकों की मिलीभगत से मौत का यह पूरा खेल चल रहा है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मिथाइल अल्कोहल से बनी शराब से मौतें हो चुकी हैं।
मिथाइल और इथाइल में फर्क करना मुश्किल
प्रदेश की डिस्टलरी में इथाइल अल्कोहल बनाया जाता है। इसी अल्कोहल का प्रयोग देसी और अंग्रेजी शराब बनाने में किया जाता है। जबकि मिथाइल अल्कोहल का इस्तेमाल केमिकल बनाने वाली फैक्ट्रियां करती हैं, यह बहुत जहरीला होता है। इन दोनों अल्कोहल में कोई आम आदमी फर्क नहीं बता सकता। कलर एक जैसा ही होता है, गंध भी एक सी ही आती है।
यूपी में 58 डिस्टलरियां बनाती हैं इथाइल अल्कोहल
उत्तर प्रदेश में 58 डिस्टलरियां हैं, इनमें पंद्रह डिस्टलरियां देसी और अंग्रेजी शराब बनाती हैं जबकि बाकी में केवल अल्कोहल का निर्माण किया जाता है। इन यूनिटों से अल्कोहल अंग्रेजी शराब वाली फैक्ट्रियों को तो जाता ही है विदेशों को भी भेजा जाता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सूबे की सभी 58 डिस्टलरियां मिलकर 114 करोड़ लीटर अल्कोहल तैयार करती हैं। यह अल्कोहल टैंकरों के माध्यम से वाइन फैक्ट्रियों को सप्लाई किया जाता है।
पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी
मिथाइल अल्कोहल से तैयार की जाने वाली शराब जानलेवा हो जाती है। माना जा रहा है कि जो टैंकर केमिकल इंडस्ट्रीज के लिए अल्कोहल लेकर जाते हैं उनसे ही मिथाइल अल्कोहल की चोरी की गई होगी। मामले की जांच बैठा दी गई है। साथ ही प्रदेश भर में अलर्ट जारी करते हुए चेकिंग के आदेश दिए गए हैं।
- किशन सिंह अटोरिया, प्रमुख सचिव आबकारी