एक मई को आनी थी गीता की बेटी करिश्मा की बारात
चाइल्ड हेल्प लाइन पर शिकायत के बाद समझाने पहुंच गए तमाम लोग, दवाब भी बनाया
चाइल्ड हेल्प लाइन पर की गई शिकायत पर एक नाबालिग लड़की की शादी होने से बच गई। पहले तो लड़की की मां किसी कीमत पर शादी रोकने को तैयार नहीं थी, लेकिन जब लोगों ने उसे समझाया, दबाव बनाया तो वह मान गई। शादी रोकने को सूचना वर पक्ष को भी भेज दी गई। बारात एक मई को आने को थी, नाबालिग का पेच फंस जाने के बाद बारात भी नहीं आई।
ब्लाक म्याऊ क्षेत्र के गांव गुढ़ाना निवासी गीता देवी विधवा उमेश चंद्र के परिवार में तीन पुत्रियां करिश्मा (15), रश्मि (13), प्रियंका (12) हैं। दो पुत्र धर्मेंद्र (18) और अरविंद (11) कुल पांच बच्चे हैं। गीता ने अपनी पुत्री करिश्मा की शादी ब्लाक अंबियापुर के गांव सुंदर नगर निवासी एक युवक के साथ तय कर दी थी। बताया कि एक मई को करिश्मा की बारात आने को थी। इसी बीच किसी ने चाइल्ड हैल्प लाइन पर शिकायत दर्जं करा दी कि विधवा गीता अपनी नाबालिग पुत्री का विवाह कर रही हैं, जो गैर कानूनी है। सूचना के बाद चाइल्ड हैल्प केंद्र म्याऊं को कोआर्डिनेटर नरसिंह प्रभाकर और महेंद्र सिंह ने गीता को समझाया कि उसकी पुत्री अभी नाबालिग है, उसकी शादी करना इस समय कानूनी जुर्म है। गांव के प्रधान टीकाराम को भी बुला लिया गया है। उन्होंने भी गीता को समझाया। काफी प्रयास के बाद गीता मान गई। इसके बाद उसने फोन करके बारात न लाने की बात वर पक्ष को बताई। उधर, गीता ने बताया कि उसकी आर्थिक स्थित ठीक नहीं है। उसके और भी बच्चे हैं। इसीलिए जितनी जल्दी हो बेटी की शादी कर ले।
शादी तो रोकी लेकिन भावुक हो उठी गीता
वह गरीब है लेकिन उसको न तो पेशन मिल रही है और न ही उसका बीपीएल कार्ड ही है। उसने गांव वालों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आज सब लोग उसे समझा रहे हैं, इससे पहले किसी ने उसकी तरफ देखा तक नहीं कि वह किस तरह से अपने परिवार को चला रही है।