प्रभारी डीजीसी (क्रिमनल) साधना शर्मा की हत्या का मामला
पीसी शर्मा समेत फरार आरोपियों की तलाश पर भी उठे सवाल
कोर्ट में अर्जी देकर पुलिस ले सकती थी गैर जमानती वारंट
प्रभारी डीजीसी (क्रिमनल) साधना शर्मा हत्याकांड में पुलिस और फरार आरोपियों के बीच शह और मात का खेल हो रहा है। पुलिस ने पीसी शर्मा समेत पांचों आरोपियों की तलाश में न तो कहीं दबिश दी और ना ही अभी तक कोर्ट में अर्जी दाखिल कर आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट हासिल करने की कोशिश की है। अगर ऐसा ही रहा तो दो-चार दिन में फरार आरोपियों के कोर्ट में सरेंडर करने का सिलसिला शुरू हो जाएगा।
हाई प्रोफाइल मर्डर केस में पुलिस की भूमिका पर शुरू से उठे रहे सवालों के बीच सबसे अहम तो यही रहा कि विवेचक ने मृतका साधना शर्मा के सेलफोन को कब्जे में लेकर उसे फॉरेंसिक जांच को प्रयोगशाला भेजने की जरुरत ही महसूस नहीं की थी। सेलफोन को लेकर मृतका की बहन विपर्णा गौड़ ने तो विवेचक ही नहीं बल्कि एसएसपी से बात की थी। विपर्णा को उम्मीद थी कि सेलफोन वॉयस रिकार्डिंग रिकवर हो जाने के बाद कई सबूत पुलिस के हाथ लग जाते जो केस में एविडेंस के काम आते। सबूत जुटाने के लिए पुलिस ने अभी तक साधना शर्मा के बैंक अकाउंट से हुए लेनदेन की भी फेहरिस्त हासिल नहीं की है।
केस में अब तक पकड़े जा चुके डीआरडीए के बाबू गिरीशचंद्र मिश्रा, टवेरा मालिक राजू और कुख्यात बदमाश मस्ताना में से किसी से भी पुलिस धेला भी बरामद नहीं कर पाई। जबकि पुलिस का दावा था कि साधना शर्मा की हत्या 4.5 लाख रुपये की सुपारी देकर कराई गई थी। तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाने के बाद पुलिस यह करना होता है कि वह सबूत जुटाने के साथ आरोपियों की गिरफ्तारी को कोशिश करे। सूत्रों की मानें तो पुलिस ने फरार आरोपियों की तलाश के लिए कोई टीम ही गठित नहीं की और न ही ऐसी कोई दबिश दी गई जो आरोपियों को अंडरप्रेशर लेने में सहायक बनती। यहां तक कि पुलिस ने अभी तक पांचों आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट हासिल करने के लिए कोर्ट में अर्जी भी दाखिल नहीं की है। इसके विपरीत आरोपियों में एक पीसी शर्मा की सरेंडर करने को प्रार्थना पत्र कोर्ट में पहुंच चुका है।
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किस्मत की धनी निकली उझानी पुलिस
उझानी। साधना शर्मा के ब्लाइंड मर्डर की सच्चाई सामने लाने में सबसे अहम रोल रहा बिल्सी के गांव बेहटा गुसाईं के शमशाद नामक युवक का। पोल खोलने की शुरूआत उसी ने बिल्सी थाने जाकर की थी। यह बात पुलिस महकमा के अफसर भी जानते हैं। उसी की निशानदेही पर टवेरा मालिक और डीआरडीए का बाबू पकड़ा गया। इन्हीं से पूछताछ कर पुलिस ने केस खोला था। शमशाद का तो कोई दोष नहीं रहा लेकिन राजू और गिरीश समेत आठ नाम सामने आ गए। पीसी शर्मा और मस्ताना का नाम भी इन्हीं में शामिल रहा। मस्ताना का मुजरिया पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
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ट्रांसफर हो सकती है विवेचना!
उझानी। मृतका की बहन विपर्णा गौड़ पुलिस की विवेचना से पूर्णत: सहमत नहीं हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने जानकारों से राय मशविरा किया है। आरोपियों को छूटने का कोई मौका नहीं मिल पाए, इसके लिए वह विवेचक को सबूत मुहैया कराने को भी तैयार हैं लेकिन विवेचना से नहीं लगता कि पुलिस सहीरास्ते पर चल रही है। जरुरत पड़ी तो वह विवेचना किसी अन्य इंसपेक्टर से कराने की मांग भी करेंगी।
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साधना शर्मा हत्याकांड में आरोपियों की तलाश की जा रही है। मुखबिरों को भी लगाया गया है। कुछेक की लोकेशन ट्रेस करने के प्रयास भी शुरू कर दिए गए हैं। फरार को हर हाल में गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।
- एके सिंह, कार्यवाहक, कोतवाल।