तहसील क्षेत्र के गांव खिरक नगला में अवैध कब्जे से जमीन मुक्त कराकर असली पट्टेदार को कब्जा दिलाया गया। इससे अवैध कब्जेदार चिढ़ गया और असली पट्टेदार के बारे में अधिक जमीन कब्जाने का आरोप लगाकर फसाद करने पर आमादा है। इधर, कानून-गो ने रिपोर्ट दी कि अवैध कब्जा के लिए लेखपाल भी जिम्मेदार है। जिसने नक्शा में गड़बड़ी की है।
एसडीएम और पूर्व विधायक प्रेमपाल सिंह यादव के सामने यह मामला आया है। पैमाइश कर और पट्टे पर असली पट्टेदार काबिज कराके आए कानूनगो हरीराम ने बताया कि वर्ष 1392 में प्रधान के हस्ताक्षर से अवैध रूप से महेंद्र ने अपना पट्टा बताकर जमीन पर कब्जा कर लिया था। जबकि नेकसू, ब्रजराज आदि को पट्टेदार होते हुए भी कब्जा नहीं मिल रहा था। कब्जा दिलाए जाने की हकीकत बताते हुए कानून-गो ने एसडीएम को बताया कि लेेखपाल ने भी इस प्रकरण में नक्शा में गड़बड़ी की है। इधर, जिस व्यक्ति से अवैध पट्टे से कब्जा हटवाया गया है। उसने पट्टा धारक को अधिक जमीन दिए जाने के बहाने माहौल खराब करना शुरू कर दिया है। इससे गांव में तनाव बढ़ रहा है। एसडीएम ओपी तिवारी ने कहा कि असली पट्टेदार को ही कब्जा मिल चाहिए, सो मिल चुका है।
महिला की जमीन पर कब्जा
तहसील क्षेत्र के गांव बेलाडांडी में एक विधवा की जमीन पर झोपड़ी डालकर दबंगों ने कब्जा कर लिया। इस संबंध में उसने एसडीएम और कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई है।
बेला डांडी निवासी शांति विधवा हरपाल की रोड साइड करीब 40 बीघा जमीन है। गंाव के कुछ दबंगों ने इस जमीन को जोतकर झोपड़ी डाल ली। विधवा शांति ने विरोध किया तो दबंगों बताया कि उसके पति हरपाल ने उन्हें जमीन बेच दी थी, लेकिन बैनामा नहीं किया था। इसलिए जमीन अब उनकी है। विधवा शांति ने इस संबंध में एसडीएम और कोतवाली प्रभारी को तहरीर देकर खेत को कब्जा मुक्त कराने की मांग की है।