करीब एक साल पहले मूसाझाग थाना परिसर में किशोरी के साथ सिपाहियों द्वारा अपहरण करके सामूहिक दुष्कर्म करने के बहुचर्चित मामले में गुरुवार को पाक्सो कोर्ट में होने वाली सुनवाई के दौरान फिल्म सरीखा सीन देखने को मिला। जज, वकील, गवाह और आरोपी मौजूद होने के बावजूद गवाही नहीं हो सकी, क्योंकि आरोपी सिपाही अचानक कटघरे में गिरकर बेहोश हो गया। इस वजह से जज ने गवाही की तारीख 28 जनवरी मुकर्रर कर दी।
31 दिसंबर 2014 की रात को मूसाझाग थाने में कार्यरत सिपाही वीरपाल सिंह और अवनीश यादव ने क्षेत्र के एक गांव की किशोरी का उसके घर से अपहरण किया और उसके बाद उसे थाने में लाकर सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद दोनों आरोपी सिपाहियों को पकड़कर जेल भेज दिया गया था। इसी मामले में गुरुवार को पाक्सो कोर्ट में पीड़िता की मां की गवाही होनी थी।
आरोपी सिपाही वीरपाल और अवनीश के खिलाफ गवाही देने के लिए मां कोर्ट पहुंची थी। जैसे ही महिला को बुलाया गया और गवाही शुरू हुई, सो कटघरे में खड़ा आरोपी सिपाही वीरपाल गिरकर बेहोश हो गया। उसके होश में न आने पर जेल के अस्पताल में भेजा गया। वहां जांचोपरांत सिपाही को कोई खास समस्या नहीं बताई गई।
सिपाही वीरपाल के बेहोश से होने से और कुछ हुआ हो या न हुआ हो, लेकिन अदालत की कार्रवाई जरूर प्रभावित हो गई। क्योंकि आरोपी के मौजूद न होने की वजह से मां के बयान दर्ज नहीं हो सके। इस पर पाक्सो कोर्ट के स्पेशल जज वीरेंद्र कुमार पांडेय ने गवाही के लिए अगली तारीख 28 जनवरी मुकर्रर की दी है।