न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम भूदेव गौतम ने नामजद पति को दहेज हत्या में दोषी पाकर आजीवन कारावास की सजा सहित 60 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की रकम में से बतौर मुआवजा पचास फीसदी रकम वादी को देने का भी आदेश दिया है।
घटना थाना कुंवरगांव की है। वादी मुकदमा ओमप्रकाश पुत्र इतवारी लाल जहांगीरपुरी नई दिल्ली ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसने अपनी पुत्री सीमा उर्फ नीलम की शादी हरीओम पुत्र चेतराम निवासी कुंवरगांव के साथ 2007 में दो लाख रुपये खर्च करके की थी। शादी के बाद से ही उसका दामाद हरीओम, जेठ,सास खुश नहीं थे और एक लाख रुपये परचून की दुकान के लिए मांग करने लगे। इसी बात को लेकर सभी लोग प्रार्थी की पुत्री को पीटा करते थे और 30 जुलाई 2009 को उसकी पुत्री को पीटकर घर से निकाल दिया। तब उसने 20 हजार रुपये ससुराल वालों को देकर अपनी पुत्री की विदा की थी। वादी की पुत्री उसे एक रिश्तेदार की शादी में मिली तो बताया कि या तो मेरी ससुराल वालों को एक लाख रुपये दे दो वरना वह लोग उसे जान से मार देंगे।
वादी ने अपनी पुत्री को समझाकर उसकी ससुराल भेज दिया। वादी की पुत्री अपने दो पुत्रों के साथ चार दिसंबर 2012 को अपनी ससुराल पहुंची तो उसके पति हरिओम, जेठ ओमपाल, जेठानी राजकुमारी व सास सावित्री ने लात घूंसों व डंडों से मारापीटा और लाख रुपये न लाने की जिद पर मिट्टी का तेल छिड़ककर उसकी पुत्री सीमा उर्फ नीलम को जला दिया। जिसको इलाज के लिए बरेली भर्ती कराया। जहां पर उसकी पुत्री की आठ दिसंबर 2012 को मृत्यु हो गई।
विद्वान जज श्री गौतम ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी जगत सिंह यादव और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद दहेज हत्या में नामजद आरोपी पति हरीओम पुत्र चेतराम निवासी कुंवरगांव को दोषी पाकर उम्रकैद की कड़ी कैद सहित 65 हजार रुपये का जुर्माना बोला है।