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पूर्व ब्लाक प्रमुख और उनके भाई को मृत्युदंड

Wed, 10 Dec 2014 05:30 PM IST
बदायूं।
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स्पेशल जज एससी-एसटी एक्ट शैलेश्वर नाथ सिंह ने चचेरे-तहेरे दलित भाइयों की हत्या के मामले में मंगलवार को सपा नेता और पूर्व ब्लाक प्रमुख पंतजलि भारद्वाज, उनके भाई वशिष्ठ भारद्वाज को फांसी और पंतजलि के दो बेटों राहुल और वरुण को उम्रकैद की सजा सुनाई है। आठ जनवरी, 2005 को विकास खंड म्याऊ में सहकारी समितियों के संचालक चुनाव के नामांकन के दौरान अशोक (28) और अरवेंद्र (26) की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में शनिवार को कोर्ट ने उक्त चारों के अलावा पतंजलि के एक और बेटे विकास भारद्वाज को दोहरे हत्याकांड का दोषी करार दिया था। विकास भारद्वाज के फरार होने की वजह से उसे सजा नहीं सुनाई जा सकी।
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स्पेशल जज ने प्रत्येक दोषी पर 6.60-6.60 लाख रुपये का जुर्माना भी किया है। कोर्ट ने जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने जुर्माने की रकम में से दोनों मृतकों के आश्रितों को 12 लाख रुपये बतौर क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया। फैसले में कोर्ट ने कहा है कि सहकारी समिति के संचालक पद के निर्वाचन के नामांकन के लिए आने वाले प्रत्याशियों को रोकना, उनसे अभद्र व्यवहार कर अपशब्द कहना, मारपीट करना और लोकतंत्र के पवित्र पर्व पर दिनदहाड़े दो दलित उम्मीदवारों पर कातिलाना हमला कर उनकी हत्या करने की मंशा जनता में भय, आतंक और दहशत का माहौल पैदा करना रही है। दोषियों ने ऐसा कर न सिर्फ अनुसूचित जाति के दो युवाओं की हत्या की है, बल्कि लोकतंत्र के पवित्र उद्देश्य और भावना से खिलवाड़ भी किया है। कोर्ट ने कहा कि दिनदहाड़े जघन्य तरीके से अंजाम दी गई घटना न केवल न्यायिक अंतर्रात्मा बल्कि पूरे समाज को व्यथित करने वाली है।
कोर्ट ने कहा कि पतंजलि और उसके भाई वशिष्ठ का जुर्म विरलतम श्रेणी में आता है। ऐसे में इन दोनों को मौत की सजा के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है। राहुल (32) और वरुण (26) युवा हैं, जिन्होंने आपराधिक प्रवृत्ति के पिता और चाचा की तरह आपराधिक जीवन अपना लिया। दोनों हिस्ट्रीशीटर बन गए। आरोपी वरुण रेप के मामले का सजायाफ्ता है। बावजूद इसके इन दोनों की आयु को देखते हुए उनमें सुधार की संभावना है। इसलिए राहुल और वरुण को उम्र कैद की सजा सुनाई जाती है।
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