दर्जा राज्यमंत्री बनवारी सिंह का रिश्तेदार है हत्या में उम्रकैद की सजा काट रहा मोरपाल
इलाज के बहाने जेल से भेजा गया था अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज
एक दिन पहले जेल लौटे तो डिस्चार्ज स्लिप न होने पर अधीक्षक ने नहीं कराई एंट्री
राजनीतिक पहुंच है तो कुछ भी हो सकता है। सारे अफसर वैसे ही डरे रहते हैं। हत्या में उम्रकैद की सजा काट रहा एक मुजरिम दो सिपाहियों के साथ 13 दिन जेल से गायब रह सकता है, अधिकारी उन सिपाहियों पर भी कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं जिनकी अभिरक्षा में अभियुक्त को दिया गया था। दिलचस्प तो ये है कि यह कैदी इलाज के बहाने अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज रिफर किया गया था लेकिन वह अस्पताल में गया ही नहीं। यानी जेल अफसरों ने नेता जी के रसूख के चक्कर में एक भले चंगे को घूमने के बहाने छु्टटी दे दी थी। जब अभिरक्षा में तैनात सिपाहियों का ही पता नहीं चल पाया तो ढूंढ मची। इतने में कैदी खुद जेल पहुंच गया। कैदी के पास अस्पताल की डिस्चार्ज स्लिप नहीं थी तो उसे अंदर लेने से मना कर दिया गया। वह फिर सिपाहियों के साथ गायब है। इस रसूखदार कैदी का नाम है मोरपाल सिंह यादव। यह हत्या का मुल्जिम है और इनका असली परिचय है कि वह सपा के वरिष्ठ नेता और दर्जा राज्यमंत्री बनवारी सिंह यादव के समधी हैं।
16 मार्च को कैदी मोरपाल सिंह को दो सिपाहियों की अभिरक्षा में अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज इलाज के लिए भेजा गया था। इस बीच सिपाहियों से संपर्क न हो पाने पर दो दिन पहले उनकी ढूंढ मची तो मोर सिंह सोमवार को खुद जेल पहुंच गया। मामले में जेल प्रशासन ने अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज से रिपोर्ट तलब की है। इधर एसपी सिटी ने आरआई लाइन से रिपोर्ट तलब की है। वैसे अमर उजाला ने अपने स्तर से पता किया तो पता चला कि मोरपाल सिंह नाम का कोई व्यक्ति या कैदी वहां लाया ही नहीं गया।
मूसाझाग थाने के गांव नवदिया नवादा सुलरा निवासी पूर्व प्रधान मोरपाल सिंह यादव को हत्या के मामले में कोर्ट ने छह महीने पहले उम्रकैद की सजा सुनाई है। अपने राजनीतिक रसूख के चलते मोरपाल सिंह का पंचायत चुनाव के दौरान भी इलाज के बहाने जेल से बाहर आना-जाना होता रहा। जेल अधीक्षक एनएल दोहरे के अनुसार 16 मार्च को पैर में दिक्कत बताने पर जेल अस्पताल के डॉक्टर एमके गुप्ता ने कैदी को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के लिए रिफर किया। जेल से जाने के बाद मोरपाल की कोई खोज खबर नहीं ली गई। अभिरक्षा में पुलिस लाइंस से सिपाही दुर्गा सिंह और राम प्रसाद को भेजा गया था। इन दोनों सिपाहियों के खिलाफ आरईआर सुरेश बाबू यादव ने रिपोर्ट तैयार कर एसपी सिटी को भेज दी है।
पूरा मामला मेरे संज्ञान में है। इस बारे में आरआई लाइन से रिपोर्ट तलब की गई है। रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में कठोर कार्रवाई की जाएगी।
-अनिल यादव, एसपी सिटी
मोरपाल की अभिरक्षा में भेजे गए दोनों सिपाहियों की कई दिन तक लोकेशन नहीं मिली। पता लगा है कि मोरपाल मेडिकल कॉलेज में भर्ती नहीं है। सिपाहियों ने भी इस बारे में कुछ नहीं बताया था। दोनों सिपाहियों के खिलाफ रिपोर्ट एसपी सिटी को भेजी जा रही है।
-सुरेश बाबू यादव, आरआई लाइन
सोमवार को मोरपाल जेल पहुंचा था। उसके पास मेडिकल कॉलेज की डिस्चार्ज स्लिप नहीं थी। इस वजह से उसे जेल से लौटा दिया गया। पता लगा है कि वह मेडिकल कॉलेज में भर्ती ही नहीं हुआ। वह कहां था, इस समय कहां है? इसकी जानकारी मुझे नहीं है। यह काम पुलिस का है।
-एनएल दोहरे, जेल अधीक्षक
मोरपाल मेरे छोटे भाई उरबान सिंह के रिश्तेदार हैं। मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। ये जेल प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह कैदी के बारे में जानकारी रखे। मामले से मेरा कोई लेना-देना नहीं है।
- बनवारी सिंह यादव, सपा जिलाध्यक्ष एवं दर्जा राज्यमंत्री