- पांच साल में पांच गुना से अधिक में उठा था ठेका
- बोली अधिक की लगी तो बढ़ेगी शुल्क की वसूली
पार्किंग ठेका ने एक बार फिर पालिका प्रशासन को परेशानी में डाल दिया है। परेशानी की वजह पालिका को आर्थिक नुकसान नहीं बल्कि ठेका की बोली हर साल ही लाखों की रकम में बढ़ जाने से है। ठेका पिछले वितीय वर्ष में जब पांच साल के मुकाबले पांच गुनी अधिक रकम पर उठा तो उसका सीधा असर वाहन चालकों और उनके मालिकों पर पड़ा। उनसे दर बढ़ाकर पालिका शुल्क की वसूली की गई। शनिवार को लगने वाली बोली से पालिका को नुकसान होगा या फिर फायदा लेकिन लोगों की सहूलियत की दिशा जरूर तय हो जाएगी।
पालिका शुल्क के ठेका को लेकर पिछले कुछ दिनों से दावेदारों में गहमागहमी का माहौल नजर आया। आठ-नौ दिन पहले मार्केट में पार्किंग शुल्क वसूली को लेकर एक राजनीतिक दल से जुड़े लोगों ने लाउडस्पीकर से मुनादी करा दी थी कि पालिका से तय रकम से अधिक वसूली करने पर ठेकेदार की पुलिस से शिकायत की जाए। मामला पालिका प्रशासन के संज्ञान में भी पहुंचा था। लोगों का कहना है कि ठेका अधिक रकम पर उठने की वजह से व्यापारियों के साथ वाहन चालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। जानकारों का कहना है कि ठेका लेने के लिए कई लोग तैयार तो हैं लेकिन वह पहले के मुकाबले बोली कम रकम पर छूट जाने के इच्छुक हैं। इसके पीछे दावेदारों का तर्क है कि ठेका कम पर उठा तो पालिका शुल्क भी निर्धारित रेट लिस्ट पर वसूल किया जाएगा। ऐसा होने पर व्यापारियों के साथ वाहनों चालकों को सहूलियत मिलेगी।
पांच साल में पार्किंग ठेका पर नजर
वित्तीय वर्ष ठेकेदार बोली की रकम
2016-17 अवधेश कुमार 58.01 लाख
2015-16 अवधेश कुमार 51 लाख
2014-15 अवधेश कुमार 42.50 लाख
2013-14 राममहेश यादव 21 लाख
2012-13 अवधेश कुमार 11 लाख
पालिका प्रशासन ठेका पार्किंग के लिए बोली लगाने के लिए दावेदारों को आमंत्रित कर चुका है। बोली एसडीएम सदर की मौजूदगी में लगेगी। नियमानुसार बोली पहले के मुकाबले अधिक पर आनी चाहिए, लेकिन बहुत कुछ परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।
- संजय कुमार तिवारी, अधिशासी अधिकारी।