फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बीमारी से बालक की मौत, हत्या का मुकदमा

Mon, 04 Jan 2016 09:48 PM IST
अमर उजाला, बदायूं
विज्ञापन
विज्ञापन
बिनावर थाने के गांव चंदन नगर खरैर निवासी पन्ना लाल का गांव के ही केंद्रभान, उदयवीर और वीरेंद्र से विवाद चल रहा है। छह महीने पहले दोनों पक्षों में मारपीट हुई थी। पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ मुचलका पाबंद की कार्रवाई कर दी थी। पन्ना लाल का आरोप है कि रविवार दोपहर उसके बेटे कुंवरचंद्र का केंद्रभान से विवाद हो गया। शिकायत पर थाने से एक दरोगा गांव पहुंचा। दरोगा के वापस जाने के बाद उदयवीर, केंद्रभान और वीरेंद्र ने उनके घर पर धावा बोल दिया। कुंवरचंद्र मजदूरी पर गया था। घर पर पन्ना लाल और उसके बेटे कुंवरचंद्र का छह साल का पुत्र राजाबाबू अकेले थे। केंद्रभान, उदयवीर और वीरेंद्र ने राजा बाबू को लात-घूसों से पीटा, जिससे उसकी मौत हो गई। पन्ना लाल की तहरीर पर पुलिस ने गैर इरादतन हत्या की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर उदयवीर को हिरासत में ले लिया है। इधर, देर शाम आई बालक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर गौर करें तो बालक लंबे समय से बीमार चल रहा था। उसके फेफड़ों में संक्रमण था। इसके साथ वह कुपोषण का भी शिकार था।
विज्ञापन

बालक की हत्या वाली खबर में वर्जन
वर्जन-
बालक के परिवार वालों का आरोप है कि उसकी पीट-पीट कर हत्या कर गई है। उसके आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। पोस्टमार्टम में बालक की मौत की वजह बीमारी बताई गई है। हालांकि, यह बात सही है कि रविवार को दोनों पक्षों में झगड़ा हुआ था। इस मामले में पुलिस विवेचना कर रही है। किसी निर्दोष को नहीं फंसने दिया जाएगा।
-सौमित्र यादव, एसएसपी


दोनों पक्षों में पहले से चल रहा था विवाद
शनिवार को भी हुआ था दोनों पक्षों में झगड़ा
बदायूं। छह साल के बालक राजाबाबू की मौत की वजह बीमारी जरूर बताई गई है, लेकिन किसी के गले यह बात नहीं उतर रही कि जब बालक की मौत बीमारी से हुई है तो हत्या का आरोप क्यों लगाया गया। हालांकि यह बात सही है कि शनिवार को भी कुंवरचंद्र और उदयवीर पक्ष के बीच कहासुनी हुई थी। इसके बाद उदयवीर पक्ष के लोग शनिवार शाम कुंवरचंद्र के घर पर भी पहुंचे थे। वहां भी कहासुनी हुई थी।
विज्ञापन

चंदननगर खरैर निवासी कुंवरचंद्र और उदयवीर पक्ष के लोग खेतीबाड़ी और मेहनत मजदूरी करके परिवार चलाते हैं। छह महीने पहले दोनों पक्षों में मारपीट हुई थी। गांव वालों की मानें तो राजाबाबू बीमार चल रहा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी इस बात की तस्दीक कर रही है। बालक के शरीर पर कोई चोट का निशान भी नहीं है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर बालक की मौत बीमारी से हुई है तो परिवार वालों ने बालक की मौत को इस तरह से मोड़ क्यों दिया। फिलहाल यह पुलिस पड़ताल का विषय है, लेकिन इतना साफ है कि सिर्फ पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से मामले को सुलझाना पुलिस के लिए आसान नहीं होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें