चर्चित रिटायर्ड इंजीनियर गुप्ता दंपति हत्याकांड में जांच कर रही सीबीआई ने गुरुवार को गुप्ता दंपति के घर का मुआयना किया। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने तत्कालीन चौकी इंचार्ज से मामले में जानकारी ली। इसके साथ ही गुप्ता दंपति के बड़े बेटे और पुत्रवधू से पूछताछ की। गुप्ता दंपति का पोस्टमार्टम करने वाले तीन डॉक्टरों के पैनल को भी पूछताछ को बुलाया गया है।
सदर कोतवाली के मोहल्ला ब्राह्मपुर निवासी रिटायर्ड इंजीनियर विजेंद्र गुप्ता (75) और उनकी पत्नी सन्नो गुप्ता (70) के शव आठ अप्रैल की रात घर की रसोई में मिले थे। दंपति की चाकुओं और नुकीली रॉड से गोदकर हत्या की गई थी। आईजी, डीआईजी ने भी घटनास्थल का मुआयना किया था। पेचीदा मर्डर मिस्ट्री के वर्कआउट को एसटीएफ समेत पुलिस की पांच टीमों को लगाया गया। कातिलों की सुरागरसी के लिए बरेली और मुरादाबाद की फॉरेंसिक टीमों के साथ फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट भी जुटे रहे, लेकिन पुलिस कोई ठोस क्लू नहीं तलाश सकी।
हत्याकांड का खुलासा करने में पुलिस फेल हो गई तो प्रदेश सरकार ने हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने की केंद्र सरकार से सिफारिश की। करीब एक साल के बाद सीबीआई ने मामले में एफआईआर दर्ज कर पड़ताल शुरू कर दी है। गुरुवार को सीबीआई टीम विजेंद्र गुप्ता के आवास पर पहुंची। यहां उनके बड़े बेटे शेखर गुप्ता और उसकी पत्नी से पूछताछ की। दंपति के शवों का पोस्टमार्टम करने वाले फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. राजेश वर्मा समेत डॉ. अवधेश कुमार और डॉ. अंकित गुप्ता को भी जांच एजेंसी ने पूछताछ के लिए बुलाया है। बुधवार की शाम भी सीबीआई टीम गुप्ता दंपति के घर पहुंची थी।
आठ साल तक सिस्टम से लड़ते रहे विजेंद्र गुप्ता
बदायूं। बुजुर्ग विजेंद्र गुप्ता अपने निर्दोष बेटे मुकुल गुप्ता को न्याय दिलाने के लिए आठ साल तक सिस्टम से लड़ते रहे। उनकी पत्नी भी हर कदम पर उनके साथ रहीं।
दवा व्यापारी मुकुल गुप्ता की बरेली में पुलिस ने 2007 में कथित एनकाउंटर में हत्या कर दी थी। पुलिस का दावा था कि मुकुल अपने साथियों के साथ बैंक लूटने जा रहा था। फर्जी एनकाउंटर में एक आईपीएस अफसर समेत 11 पुलिस कर्मी आरोपी हैं। विजेंद्र गुप्ता के तीन पुत्रों में सबसे छोटा बेटा मुकुल गुप्ता बरेली में रहकर दवा का कारोबार करता था। 30 जून 2007 को बरेली के थाना फतेहगंज पूर्वी में विजेंद्र गुप्ता के पुत्र मुकुल गुप्ता को पुलिस ने बैंक लुटेरा बता कर एनकाउंटर में मार दिया। बेटे के कातिलों को सजा दिलाने के लिए विजेंद्र गुप्ता हाईकोर्ट तक गए। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने मामले में फरवरी 2010 में एफआईआर दर्ज कर ली। ट्रेनी आईपीएस अफसर जे रविंद्र गौड़ (तत्कालीन एएसपी बरेली), विकास सक्सेना (तत्कालीन एसओ, सीबीगंज बरेली), एसआई मूला सिंह, देवेंद्र सिंह, आरके गुप्ता, कांस्टेबल गौरी शंकर, दिनेश चंद्र, अनिल कुमार, रवि प्रकाश, वीरेंद्र शर्मा और कालीचरन (अब मृत) को आरोपी बनाया गया।
फर्जी एनकाउंटर केस में सीबीआई ने अगस्त 2014 में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी। चार्जशीट में आईपीएस जे रविंद्र गौड़ का नाम न होने से विजेंद्र गुप्ता क्षुब्ध थे। प्रदेश सरकार ने जे रविंद्र गौड़ पर केस चलाने की अनुमति नहीं दी। इस पर विजेंद्र गुप्ता ने हाईकोर्ट की शरण ली। विजेंद्र गुप्ता की याचिका पर कोर्ट ने आईपीएस गौड़ के खिलाफ केस चलाने का आदेश दिया था। इसके बावजूद गौड़ पर केस नहीं चलाया गया। हाईकोर्ट के आदेश का पालन न होने पर गुप्ता ने अवमानना याचिका दाखिल की थी। यह याचिका हाईकोर्ट में विचाराधीन है। गुप्ता इसकी पैरवी कर रहे थे। इस दौरान उनकी हत्या कर दी गई। बेटे को न्याय दिलाने की आस उनके दिल में ही रह गई।
मर्डर मिस्ट्री सुलझाना आसान नहीं
बदायूं। विजेंद्र गुप्ता को मोहल्ले के लोगों ने पांच अप्रैल को सुबह आखरी बार देखा था। गुप्ता दंपति की बड़ी बेटी सोमन झांसी, मीनाक्षी चंदौसी में ब्याही हैं। बड़ा बेटा शेखर गुप्ता दिल्ली के उत्तमनगर और हेमंत गुप्ता बरेली के नेकपुर में रह रहे थे। दंपति की हत्या के बाद से अब हेमंत बदायूं में ही रह रहा है। पड़ोस के लोगों की मानें तो गुप्ता के घर के दरवाजे ज्यादातर बंद ही रहते थे। दंपति घर की पहली मंजिल पर रहते थे। हत्यारे कौन हैं यह तो जांच का विषय है, लेकिन यह मर्डर मिस्ट्री सुलझाना सीबीआई के लिए भी आसान काम नहीं होगा।