स्वास्थ्य विभाग में हुए एनआरएचएम घोटाला की जांच कर रही सीबीआई ने जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) का रिकार्ड मांगा है। दातागंज के ब्लाक समरेर में तीन साल पहले जेएसवाई में घोटाला सामने आया था। अविवाहित युवतियों, वृद्धा और विधवाओं का समरेर पीएचसी पर प्रसव दिखाकर उनको योजना के तहत चेक जारी कर दिए गए थे। हाल ही में क्षेत्र के गांव हसनपुर में एक मामला सामने आया। इसमें एक ही महिला को चार महीने में तीन बार जेएसवाई का लाभ दिया गया। मामले में एसबीआई के ग्राहक सेवा केंद्र के संचालक को जेल भेजा गया था।
सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने वाली महिलाओं को जेएसवाई के तहत पोषाहार के लिए धनराशि दी जाती है। शहरी इलाकों में प्रसव पर 1000 और ग्रामीण इलाकों में 1400 रुपये दिए जाते हैं। 2012 में दातागंज के ब्लाक समरेर में जेएसवाई में घोटाला सामने आया था। यहां अविवाहिता युवतियों के साथ वृद्धाओं और विधवाओं के साथ मर चुकीं महिलाओं का समरेर पीएचसी पर प्रसव होना दर्शाकर इनके नाम जेएसवाई के चेक जारी कर दिए गए थे। जांच हुई तो कई चीजें सामने आईं। बाद में यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया था।
हाल ही में हसनपुर गांव में एक महिला का चार महीने में तीन बार प्रसव होना दिखाकर उसके नाम चेक जारी किए जाने का भंडाफोड़ हुआ, तो जेएसवाई घोटाला फिर से सुर्खियों में आ गया। संभावना है कि जिले के बाकी ब्लाकों में भी इस तरह की घपलेबाजी हो सकती है। एनआरएचएम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने अब जेएसवाई का रिकार्ड भी मांग लिया है।
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कोई भी मामला मेरे कार्यकाल का नहीं है। सीबीआई ने एनआरएचएम से जुड़ीं सभी योजनाओं का रिकार्ड मांगा है। रिकार्ड में रजिस्टर आदि की संख्या बहुत ज्यादा होने की वजह से उनकी फोटो कॉपी कराने में वक्त लग रहा है।
-डॉ. दीपक सक्सेना, सीएमओ