बिजनौर शहर में सितंबर में हुए बम धमाके के तार बदायूं से जुड़ते नजर आ रहे हैं। धमाके को अंजाम देने वाले आतंकियों के संबंध में ठोस क्लू तलाशने के लिए आतंकवादी निरोधक दस्ता (एटीएस) की एक टीम बिसौली थाने के दबतोरी, संग्रामपुर, पपगांव और लक्ष्मीपुर दबतोरा के अलावा फैजगंज बेहटा थाने के सीकरी गांवों में दो दिन तक डेरा डालने के बाद मंगलवार को दिल्ली लौट गई। बिजनौर में धमाके से पहले और बाद में आतंकी कई बार इन गांवों में आए थे। एसएसपी सौमित्र यादव ने एटीएस की टीम आने की पुष्टि की है। उनका कहना है कि इस बाबत स्थानीय पुलिस को भी एलर्ट कर दिया गया है।
12 सितंबर, 14 की सुबह बिजनौर शहर के मोहल्ला जाटान में लीलावती के मकान में बम ब्लास्ट हुआ था। विस्फोट से पूरा इलाका दहल गया था। जांच में पता लगा था कि लीलावती के मकान को खुद को मुरादाबाद निवासी बताकर छह आतंकवादियों ने किराए पर लिया था। बाद में एटीएस ने यहां से एक पिस्टल, लैपटॉप, मोबाइल और सिमकार्ड बरामद किया था। धमाका बम बनाते समय हुआ था। आतंकवादियों की पहचान अमजद, असलम, एजाजुद्दीन, महबूब, असलम और जाकिर हुसैन के रूप में हुई थी। ये सभी आतंकवादी एक अक्तूबर, 2013 को मध्य प्रदेश की खंडवा जेल से फरार हुए थे। मोहल्ला जाटान से भागते समय सभी आतंकवादी ग्लैक्सी के सीसी कैमरे में कैद हो गए थे।
इसके बाद एटीएस ने आतंकवादियों के ठिकाने से मिले मोबाइल और सिमकार्ड को अपनी जांच का मुख्य आधार बनाया था। एटीएस सूत्रों की मानें तो पांच महीने की जांच-पड़ताल में आतंकवादियों के तार बदायूं के इन गांवों से जुड़े पाए गए हैं। यहां यह भी बता दें कि ये सभी गांव हवाला कारोबार को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रहे हैं।