पुलिस ने वध को ले जाई जा रही पशुओं की खेप पकड़ी है। दस तस्करों को भी गिरफ्तार किया गया है। तीन भागने में कामयाब हो गए। प्रतिबंधित पशुओं को जिले की सीमा से लगे अलीगढ़ के आलमपुर नखासे से खरीद कर संभल और रामपुर ले जाया जा रहा था। पकड़े गए तस्करों के खिलाफ पुलिस ने पशु क्रूरता और गौवध निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। गौर करने वाली बात यह है कि जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है वह किराए पर पशुओं को ले जाने का काम करते हैं।
बुधवार की शाम एसओ जरीफनगर गंगा सिंह यादव को सूचना मिली कि गंगा के सासरे घाट से बड़ी तादाद में पशुओं को लाया जा रहा है। पुलिस ने फोर्स के साथ पशु तस्करों की घेराबंदी शुरू कर दी। थाना क्षेत्र के रघुपुर गांव के पास पुलिस ने 32 पशुओं को पकड़ लिया। प्रतिबंधित पशुओं के साथ क्षेत्र के गांव कूबरी के जमुना प्रसाद, सुखवीर सिंह, दहगवां के शोरपाल, ऋषिपाल, राधे, दांदरा के डालचंद, भोगाजीत नगलिया के अमलेश, वीरेंद्र, उमेश, गुन्नौर के गांव लहरा नगला श्याम के राजपाल समेत दस लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए लोगों ने स्वीकार किया कि पशुओं को संभल और रामपुर ले जाया जा रहा था। पशुओं को अलीगढ़ के थाना दादों अंतर्गत लगने वाले आलमपुर के नखासे से खरीद कर लाया जा रहा था। बरामद पशुओं को ग्रामीणों की सुपुर्दगी में दे दिया गया है।
इस तरह चलता है पशु तस्करी का धंधा
जरीफनगर। अलीगढ़ के थाना दादों अंतर्गत आलमपुर में लगने वाले नखासे से बड़ी तादात में सफेद पशुओं की वध के लिए खरीद होती है। बड़े पशु तस्कर आसपास के ग्रामीणों को प्रति पशु एक हजार रुपये ठिकाने तक पहुंचाने के लिए देते हैं। आलमपुर-जरीफनगर के बीच गंगा के सासरे घाट पर जरीफनगर की सीमा में नावों के जरिए पशुओं को उतारा जाता है। यहां से इन पशुओं को रामपुर, मुरादाबाद और संभल भेज दिया जाता है।
फर्जी आईडी पर हुई पशुओं की खरीद
दहगवां। पुलिस ने जो 32 पशु बरामद किए हैं इनकी खरीद फर्जी आईडी पर हुई है। जांच में यह बात सामने आई है। गिरफ्तार किए गए लोगों से जो पहचान पत्र मिले हैं वह सभी फर्जी हैं। इस तरह से पशुओं की तस्करी का जिले में यह नया मामला नहीं है। बावजूद इसके पुलिस प्रतिबंधित पशुओं के असली सौदागरों तक नहीं पहुंच पा रही।