‘मैलाज’ क्रीम बनाने वाली कंपनी के खिलाफ वाद दायर
उत्तराखंड में रुड़की की इलीफार्मा सिटीकल कंपनी की मैलाज क्रीम शहर में धड़ल्ले से बिक रही है। औषधि प्रशासन ने इसी वर्ष फरवरी में इस क्रीम का नमूना भरा था। लखनऊ की राजकीय प्रयोगशाला में इसे जांच के लिए भेजा गया। जांच रिपोर्ट मार्च में प्राप्त हो गई थी। जांच में पाया गया कि क्रीम दावों के अनुरूप पूरी तरह से आयुर्वेदिक नहीं है। इस क्रीम में एलोपैथिक रसायन (हाइड्रोक्यूलान ) मिला है। जबकि कंपनी अपने इस प्रोडक्ट को पूर्ण रूप से आयुर्वेदिक क्रीम होने का दावा कर रही है। यही नहीं कंपनी इस क्रीम का निर्माण बिना लाइसेंस के कर रही है। इसकी औषधि प्रशासन टीम द्वारा विवेचना की गई। विवेचना के सभी बिंदुओं पर चर्चा के बाद शासन से इस कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की अनुमति भी ली गई। 15 अक्तूबर 2015 में अनुमति मिल जाने के बाद कंपनी पर सीधे उसी माह सीजेएम की अदालत में वाद दायर किया गया। इस मामले में अभी दूसरे पक्ष को तलब नहीं किया गया है।
डीआई पवन कुमार ने बताया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद इसकी विवेचना करने के बाद अनुमति लेने में समय लगा। इसलिए कार्रवाई में भी भी विलंब हुआ। उन्होंने बताया कि इस मामले में फिर भी कम समय लगा है। ऐसे प्रकरण में काफी समय लग जाता है। क्रीम में एलोपैथिक का हाइड्रोक्यूलान रसायन पाया गया है, चूंकि क्रीम का आयुर्वेदिक होने का प्रचार किया जा रहा है। रैपर भी इस बात का उल्लेख है। इस कारण नमूना फेल हो गया है। इसी के साथ कंपनी पर लाइसेंस न होने का मामला भी वाद में शामिल किया गया है।