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समायोजित शिक्षामित्र ने जहर खाकर जान दी

Fri, 28 Jul 2017 12:41 AM IST
उसावां (बदायूं)।
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‌शिक्षाम‌ित्र - फोटो : अमर उजाला
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-सु्प्रीम कोर्ट का फैसला आने से दो दिन पहले ही खा लिया था जहर 
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-बदायूं के उसावां ब्लॉक के रता नगला प्राथमिक स्कूल में था तैनात 
-बरेली के एक अस्पताल में इलाज के दौरान तोड़ा दम
शिक्षामित्र से बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूल में सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित हरेश यादव ने तनाव के चलते रविवार को जहरीला पदार्थ खा लिया। परिवार वालों ने उसे बरेली के एक अस्पताल में भर्ती कराया। यहां इलाज के दौरान बुधवार रात उसकी मौत हो गई। परिवार वालों का कहना है कि नौकरी में अनिश्चतता पहले से बनी हुई थी। समायोजित शिक्षकों को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना था, जिसे लेकर तरह तरह के कयास लगाए जा रहे थे। इन्हीं सब वजहों से तनाव बढ़ा और जान दे दी।   
उसावां थाने के गांव राजा नगला निवासी 43 वर्षीय हरेश यादव पुत्र रामभरोसे यादव बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा मित्र था। उसका समायोजन सहायक अध्यापक के पद पर हुआ था। बीए पास हरेश ने पत्राचार से बीटीसी किया था। उसकी तैनाती उसावां ब्लॉक के गांव रते नगला के प्राथमिक विद्यालय में थी। उसके पिता रामभरोसे यादव ने बताया कि नौकरी को लेकर वह तनाव में था। मंगलवार 25 जुलाई को शिक्षामित्रों के सहायक शिक्षक पद पर समायोजन संबंधी फैसला आने से दो दिन पहले रविवार रात उसने जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ने पर हरेश को बरेली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां इलाज के दौरान बुधवार रात उसने दम तोड़ दिया।       
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हरेश की मौत की सूचना घर पर पहुंचने के बाद यहां कोहराम मच गया। दो भाई और एक बहन में सबसे छोटे हरेश के 19 साल का एक बेटा रोहित, 14 साल की बेटी आराध्या है। हरेश की मौत के बाद उसकी पत्नी संजू देवी बदहवास है। बृहस्पतिवार को परिवार वालों ने हरेश के शव का अटैना गंगा घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया।
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शिक्षामित्रों ने कहा-व्यर्थ नहीं जाएगी शहादत
बदायूं। जहरीला पदार्थ खाकर मौत को गले लगाने वाले शिक्षा मित्र हरेश यादव की मौत की सूचना बृहस्पतिवार को सुबह पूरे जिले के शिक्षा मित्रों में फैल गई। सुबह से ही मालवीय आवास पर धरना दे रहे शिक्षा मित्रों ने हरेश की खुदकुशी पर गहरा शोक और रोष जताया। इस मौके पर शिक्षा मित्र नेताओं ने मंच से कहा कि हमारे साथी हरेश ने शहादत दी है। उसकी यह शहादत व्यर्थ नहीं जाने देंगे। समायोजन रद्द होने के बाद सड़क पर आए सारे शिक्षा मित्र अपने अधिकार को लेकर रहेंगे। इसके लिए जितना संघर्ष करना पड़े, करेंगे। शिक्षा मित्र नेता प्रदेश सरकार से वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नौकरी बचाए रखने का रास्ता निकालने की मांग पुरजोर ढंग से उठा रहे हैं।
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