पड़ोसी जिलों के बदायूं में जमे 200 पुलिसकर्मियों की सूची तैयार हो गई है। अब इनकी रवानगी का सिलसिला शुरू होने वाला है। इसी सप्ताह यह पुलिसकर्मी दो चरणों में बदायूं से बार्डर स्कीम के तहत रवाना कर दिए जाएंगे। यह वे पुलिसकर्मी हैं जिनका तबादला करीब चार महीने पहले बार्डर स्कीम के तहत दूसरे जिलों में हो गया था लेकिन यह अपने राजनीतिक रसूख के जरिए बदायूं में ही जमे हुए थे। इनको रवाना न करके अब तक बार्डर स्कीम को पलीता लगाया जा रहा था।
बार्डर स्कीम के तहत कोई भी पुलिसकर्मी अपने गृह जनपद के पड़ोसी जनपद में तैनात नहीं रह सकता। करीब चार महीने पहले शासन ने बार्डर स्कीम लागू की थी। यह स्कीम लागू होने के बाद भी 200 सिपाही और दरोगा राजनीतिक रसूख के जरिए बदायूं में ही डेरा जमाए रहे।
हाल ही में मूसाझाग थाने में गैंगरेप का मामला प्रकाश में आने के बाद खाकी दागदार हुई तो पुलिस विभाग को बार्डर स्कीम की याद आई। आनन-फानन में पड़ोसी जिलों के बदायूं में तैनात सिपाही और दरोगाओं की सूची तैयार की गई। अब इनकी रवानगी शुरू की जा रही है। एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि बार्डर स्कीम के तहत अंडर ट्रांसफर पुलिसकर्मियों को इसी सप्ताह रिलीव कर दिया जाएगा। इनकी सूची तैयार कर ली गई है।
एसओ बिसौली और बिल्सी भी अंडर ट्रांसफर
बदायूं। कहने को तो एसओ बिल्सी राजवीर सिंह यादव और एसओ बिसौली सतीश यादव भी अंडर ट्रांसफर हैं। इन दोनों दरोगाओं का दो महीने पहले तबादला हो चुका है लेकिन यह अपने राजनीतिक रसूख के दम पर कुर्सियों पर जमे हुए हैं।
गौर करने वाली बात तो यह है कि यह दोनों दरोगा थाना इंचार्ज हैं जबकि नियम यह है कि थाने का चार्ज थ्री स्टार पर ही होगा। दरोगा सतीश यादव तो बिसौली के कोतवाल बने बैठे हैं।