मूसाझाग (बदायूं)। एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी मंगलवार रात ग्रामीण की वेशभूषा में मूसाझाग थाने पहुंच गए। हड़बड़ाते हुए ड्यूटी पर तैनात दरोगा से बोले- साब, मैं अपनी पल्सर बाइक से बदायूं से दातागंज आ रहा था। अभी-अभी रास्ते में तीन बदमाशों ने मेरी बाइक लूट ली है। उन्होंने मेरी कनपटी पर तमंचा लगा दिया, जिससे मैं कुछ नहीं कर सका और वे मेरी बाइक लूटकर ले गए।
दरोगा सचिन कुमार कुछ समझ पाते, उससे पहले एसएसपी ने रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की। दरोगा ने भी समय न गंवाते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। सबसे पहले वायरलेस सेट पर बाइक लूट की सूचना दी। रात्रि गश्त पर तैनात पुलिस कर्मियों से कहा कि एक बाइक लूट ली गई है। पूरा लोकेशन बताते हुए चेकिंग अभियान शुरू करा दिया।
दरोगा फरियादी बनकर पहुंचे एसएसपी से नाम पता पूछ ही रहा था कि पीछे से सुरक्षा में लगे सिपाही पहुंच गए। तब तक एसएसपी पूरे थाने की गतिविधियों को परख चुके थे। सिपाहियों के बताने पर मूसाझाग पुलिस हैरान रह गई। वहीं, एसएसपी ने दरोगा की सक्रियता पर खुश होकर न सिर्फ पीठ थपथपाई बल्कि ढाई हजार रुपये का इनाम भी दिया। इस दौरान एसएसपी ने अपनी गाड़ी और सुरक्षा में लगे पुलिस कर्मियों को काफी पीछे छोड़ दिया था। इस दौरान एसओ ललित भाटी और थाने का अन्य स्टाफ गश्त पर मिला।
बोला दरोगा, वर्दी में देखा था, सो पहचान नहीं पाया
पुलिस के मुताबिक एसएसपी आम ग्रामीणों की तरह कपड़े पहने थे तथा पैरों में चप्पल थी। सिर पर सफेद शॉल ओढ़ रखी थी, लेकिन उनका चेहरा दिखाई दे रहा था। अब सवाल ये उठता है कि दरोगा एसएसपी को पहचान क्यों नहीं पाए, क्योंकि उनका चेहरा तो वही था और मातहत एसएसपी को न पहचान पाए ऐसा तो संभव नहीं है। ऐसे में इस निरीक्षण पर सवाल भी उठ रहे हैं। हालांकि इस बारे में दरोगा सचिन कुमार का कहना था कि अब तक उन्होंने एसएसपी को हमेशा वर्दी में देखा था। ऊपर से उन्होंने सिर पर शॉल ओढ़ रखी थी, जिससे वह पहचान में नहीं आए, लेकिन बाद में उनकी सुरक्षा में लगे पुलिस कर्मी देखे तो पूरा मामला समझ आ गया।