बदायूं। रस्सी को सांप और सांप को रस्सी बनाने में माहिर मानी जाने वाली पुलिस का एक और खेल सामने आया है। पिस्टल बरामदगी के मामले को स्थानीय पुलिस भले ही दबाने की कोशिश करती रही हो लेकिन एडीजी प्रेम प्रकाश ने इस मामले की जांच कर रहे आईजी का तबादला हो जाने के बाद अब डीआईजी को जांच दी है। माना जा रहा है कि यदि जांच सही से होती है तो वो लोग भी लपेटे में आ सकते हैं, जिन्हें स्थानीय पुलिस बचाने की कोशिश कर रही है।
सिविल लाइंस और स्पेशल टीम ने नवंबर माह में अलग-अलग छापामारी दिखाकर मुंगेर से लाई गई आठ पिस्टल बरामद की थीं, साथ ही नौ लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें ककराला निवासी भूरा को मुख्य आरोपी बताया गया था। उस समय चर्चा रही थी कि पुलिस ने मुंगेर की पिस्टल अलग-अलग स्थानों से नहीं, बल्कि शहर में एक गन हाउस पर छापा मारकर बरामद की थीं। पुलिस पर मुख्य आरोपियों को छोड़ देने के भी आरोप लगे थे, लेकिन पुलिस उस समय गिरफ्तार किए गए नौ लोगों को ही दोषी मानती रही। इधर, इस मामले की शिकायत एडीजी प्रेम प्रकाश के पास पहुंची तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच तत्कालीन आईजी डीके ठाकुर को सौंपी। पिस्टल मामले की जांच पूरी नहीं हो पाई थी कि तब तक उनका ट्रांसफर हो गया। उनके स्थान पर डीआईजी राजेश कुमार पांडेय आए हैं। अब एडीजी प्रेम प्रकाश ने पिस्टल मामले की जांच उन्हें सौंप दी है। इससे पिस्टल मामले का खुलासा करने वाले पुलिस अधिकारियों की धड़कने बढ़ गई हैं। वहीं उनकी कार्रवाई पर कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। डीआईजी की जांच में कौन दोषी और कौन निर्दोष साबित होता है, यह तो समय ही बताएगा।
बदायूं के सिविल लाइंस थाना पुलिस ने पिस्टल पकड़ीं थीं। उसकी जांच आईजी डीके ठाकुर को सौंपी थी। अब उसकी जांच डीआईजी राजेश कुमार पांडेय कर रहे हैं। उन्होंने अभी जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी है। रिपोर्ट आने पर ही कोई कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-प्रेम प्रकाश, एडीजी बरेली जोन, बरेली