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ट्रक की साइड लगने से खंदी में गिरी बोलेरो, ग्रामीण की मौत

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उझानी (बदायूं)। बीमार ग्रामीण का इलाज के कराने के लिए वृंदावन के लिए बोलेरो से निकले एक परिवार के पांच सदस्य रास्ते में हादसे का शिकार हो गए। बोलेरो को कछला के पास सामने से आ रहे ट्रक ने साइड मार दी। टक्कर लगते ही बोलेरो सड़क किनारे खंदी में गिरकर पलट गई। बोलेरो सवार ग्रामीण की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पत्नी और बेटा समेत चार लोग घायल हैं। इनमें मृतक की पत्नी की हालत नाजुक बनी हुई है।
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हादसा बरेली-मथुरा हाईवे पर शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे हुआ। हजरतपुर थाना क्षेत्र के गांव बिहारीपुर अजब निवासी अनिल कुमार सिंह (43) पिछले कई महीनों से बीमार थे। इलाज बरेली में भी चला लेकिन सुधार नहीं होने पर घरवाले उन्हें लेकर बोलेरो से वृंदावन के लिए निकले थे। कछला में फिलिंग स्टेशन के पास सामने से तेज रफ्तार ट्रक ने बोलेरो को चपेट में ले लिया। इसके बाद बोलेरो अनियंत्रित होकर खाई में गिरते ही पलट गई। बोलेरो सवार लोगों के चीख पुकार मचाने पर दो-तीन वाहन रुके। उनसे उतरे लोगों ने बोलेरो सवार घायलों को बाहर निकाला लेकिन तब तक अनिल की मौत हो चुकी थी। घायलों में मृतक की पत्नी प्रवेश कुमारी (41), उसका बेटा साहिल (20), रिश्तेदार दातागंज में उरैना निवासी धर्मेंद्र (40) और मृतक का साला दातागंज में ही कुडरा ढाका निवासी हरमेश (30) शामिल हैं। बोलेरो को धर्मेंद्र चला रहा था। राहगीरों ने घायलों की अस्पताल पहुंचाने में मदद की। हादसे के बाद चालक ट्रक लेकर मौके पर से फरार हो गया। सूचना के बाद मृतक के नाते-रिश्तेदार और परिवार के लोग भी रोते-बिलखते अस्पताल आ गए। मृतक की पत्नी की हालत नाजुक बताते हुए उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है। प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि ट्रक के नंबर का अभी पता नहीं लग पाया है। दोपहर बाद शव का पोस्टमार्टम कराके उसके घरवालों को सौंप दिया गया।
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कुदरत को तो यही था मंजूर, वरना ट्रेन से ले जाते घरवाले
उझानी। बिहारीपुर अजब निवासी अनिल कुमार सिंह कैंसर और क्षयरोग से ग्रस्त थे। किसी ने उन्हें बताया था कि वृंदावन में दोनों ही बीमारियों का अच्छी तरह से इलाज हो जाएगा। घरवालों ने होली से पहले उन्हें ट्रेन के जरिए वृंदावन ले जाने की योजना भी बना ली लेकिन होली पर ट्रेनों में भीड़भाड़ अधिक होने की वजह से घरवालों ने इरादा बदल कर बोलेरो से जाना तय किया। घायलों में रमेश ने बताया कि अनिल की दिक्कत को समझते हुए ही इरादा बदला गया था। शायद कुदरत को भी ऐसा ही मंजूर था।
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