सिविल लाइंस इलाके में नगला शर्की गांव और दातागंज रेलवे क्रॉसिंग के बीच 13 अक्तूबर को रेलवे पटरियो के बीच दो छात्रों के शव मिले थे। इनकी पहचान ग्राम नौनी टिकन्ना निवासी 15 वर्षीय हिमांशु पुत्र वेदपाल और 13 साल के अमित गिरि पुत्र बबलू गिरि के रूप में हुई थी। मौके के हालात दोनों छात्रों की हत्या की ओर इशारा कर रहे थे। परिवार वाले भी हत्या का आरोप लगा रहे हैं। उस रात 11 बजे के बाद कोई ट्रेन भी नहीं नहीं गुजरी थी। बावजूद इसके पुलिस हादसा बताकर मामले को दबाने की कोशिश में है। घटना की अब तक रिपोर्ट भी दर्ज नहीं की गई। अब एक छात्र के भाई को जान से मारने की धमकी दी गई है। इससे छात्र का भाई और परिवार वाले दहशत में हैं।
छात्रों के परिजनों की ओर से सिविल लाइंस थाने में तहरीर दी जा चुकी है। परिजनों का कहना है कि दोनों छात्रों को कुछ अंजान लोग अपने साथ ले गए थे। उन्होंने ही छात्रों की हत्या की है। तहरीर देने के बावजूद पुलिस ने अब तक न हत्या की रिपोर्ट दर्ज की और न हादसे की। इससे परिवार वाले टेंशन में हैं।
शनिवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे छात्र अमित गिरि के बड़े भाई दुष्यंत गिरि के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल पहुंची। उस वक्त अमित गिरी अपने खेत पर काम कर रहा था। फोन करने वाले ने कहा कि ‘बेटा अगला नंबर तुम्हारा है’। दुष्यंत ने कहा कि हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है? उसे जवाब मिला- बेटा अब समझ लो। इतना कहने के बाद फोन कट गया। धमकी भरा फोन आने से दुष्यंत बुरी तरह डर गया। उसने घर जाकर अपने परिवार वालों को बताया। फिर परिजनों के साथ दातागंज कोतवाली गया। दातागंज पुलिस ने कह दिया कि यह मामला सिविल लाइंस थाने का है, वहीं जाओ। दोपहर के समय परिजन सिविल लाइंस थाने पहुंचे और पूरी बात बताई। इंस्पेक्टर अनिल कुमार सिरोही ने उस नंबर पर फोन किया। कॉल रिसीव करने वाले ने इंस्पेक्टर का नाम सुनकर फोन काट दिया। इसके बाद से मोबाइल बंद जा रहा है।
इस पर पुलिस ने मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगवा दिया है। देर शाम तक वह नंबर स्विच ऑफ आता रहा। सिविल लाइंस पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है।
शुरू से मिल रहे थे हत्या के संकेत
दोनों छात्रों के परिवार वालों के मुताबिक इस घटना में शुरू से ही हत्या के संकेत मिल रहे हैं। छात्रों का गांव से आना और उनका ट्रेन की पटरी पर शव मिलना सब शक के घेरे में हैं। अगर दोनों ट्रेन की चपेट में आए थे, तो किसी का अंगभंग क्यों नहीं हुआ। उनमें किसी एक का अंगभंग होता, तो ट्रेन से हादसा मान सकते थे।
ट्रेन गुजरने का लंबा समय
स्टेशन अधीक्षक के मुताबिक रात करीब 11 बजे कासगंज से बरेली जाने वाली आखिरी ट्रेन है। उसके बाद ट्रैक पर कोई ट्रेन नहीं गुजरी। जबकि दोनों छात्र सुबह करीब पांच बजे पटरी पर पड़े मिले थे। उस दिन अनुमान लगाया गया था कि शायद मालगाड़ी गई हो, लेकिन स्टेशन अधीक्षक के रिकार्ड में कोई मालगाड़ी भी नहीं गई। अगर हादसा मान लिया जाए, तो क्या दोनों छात्र छह घंटे तक पड़े रहे।
हां छोटे बाले छात्र का भाई आया था। अगर उसे किसी ने धमकी भी दी है तो यह मामला दातागंज कोतवाली क्षेत्र का है। हमारे यहां से उसका क्या लेना-देना। यह दातागंज पुलिस देखे कि उसे किसी ने धमकी दी है या नहीं। बाकी हम दोनों छात्रों की मौत के मामले की जांच कर रहे हैं। -अनिल कुमार सिरोही, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस