बदायूं। शनिवार दोपहर जहर खाकर अस्पताल परिसर में बेहोश मिली युवती की मौत हो गई थी। रविवार को उसकी शिनाख्त हो गई। इसके बाद परिवार के लोग उसका शव साथ ले गए। वह चौधरी सराय में अपने चार बच्चों के साथ मां के घर पर रहती थी। पति से दो साल से विवाद चल रहा था।
शनिवार दोपहर कोई व्यक्ति करीब 30 साल की युवती को जिला अस्पताल परिसर में बने मंदिर के चबूतरे पर छोड़कर चला गया था। अस्पताल स्टाफ ने देखा कि उसने सल्फास खा रखी है। उसे बचाने की कोशिश की गई पर एक घंटे बाद ही उसकी मौत हो गई। मृतका ने जो नाम पता बताया, उसके आधार पर उसके परिवार को नहीं खोजा जा सका। पुलिस के साथ ही समाजसेवी जगदीश अरोरा ने भी इसके लिए काफी प्रयास किया। अज्ञात के तौर पर ही उसके शव का पोस्टमार्टम करा दिया गया।
रविवार को अमर उजाला में खबर छपने के बाद युवती के परिवार के लोगों ने मोरचरी में जाकर शव की पहचान पूजा के रूप में कर ली। पूजा की मां राजकुमारी ने बताया कि वह लालपुल के पास गली में रहती हैं। पूजा के अलावा उनका बेटा विजय और पूजा की बारह साल की बेटी तनु भी उनके साथ रहते थे। उन्होंने बताया कि पूजा की शादी बरेली के आंवला थाना क्षेत्र के गांव गौंटिया निवासी वीरेंद्र से की थी। वीरेंद्र से उसके चार बच्चे हैं। बड़ी बेटी को छोड़कर बाकी तीनों बच्चे पायल, प्रिंस और बाबी अपने पिता वीरेंद्र के साथ रहते हैं। पति मारपीट करता था तो करीब सवा साल से बेटी उनके ही साथ रहती है। वह पंजाबी कॉलोनी के कुछ घरों में काम करने जाती थी और शाम को आ जाती थी। शनिवार को भी वह काम के लिए सुबह साढ़े नौ बजे निकल गई। शाम तक वह नहीं आई तो वह लोग उसे खोजने लगे। उसकी कहीं पता नहीं चला। सुबह यह खबर पढ़कर चले आए। वह नहीं समझ पा रहे कि पूजा ने जान क्यों दी। पूजा के भाई विजय ने बताया कि बहन की मौत की वजह जानने की कोशिश कर रहे हैं। किसी साजिश का शक लगेगा तो तहरीर देंगे।